Home पोल्ट्री Poultry: मुर्गियों को तीन बीमारी रानीखेत, कॉक्सिडियोसिस और सीआरडी से बचाने पर ही होगी तगड़ी कमाई
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Poultry: मुर्गियों को तीन बीमारी रानीखेत, कॉक्सिडियोसिस और सीआरडी से बचाने पर ही होगी तगड़ी कमाई

DAHD has formulated the Poultry Disease Action Plan
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहते हैं कि पोल्ट्री फार्मिंग (Poultry Farming) में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो फिर मुर्गियों को बीमारियों से बचाने के उपाय करें. यदि मुर्गियां बीमार हुईं तो फिर फायदा तो भूल ही जाइए. जबकि मुर्गियों की गई ऐसी बीमारियां हैं जो एक झटके में पोल्ट्री फार्मिंग के बिजनेस को खत्म कर देती हैं. रात में मुर्गियों की संख्या ज्यदा रहती है और अगले दिन मृत्युदर से आधी हो सकती है. इसलिए मुर्गी पालन में सफल होने के लिए जरूरी है कि मुर्गियों को हर तरह की बीमारियों से बचाया जाए, ताकि मुनाफा अच्छा मिल सके.

मुर्गियों को खासकर रानीखेत, कॉक्सिडियोसिस और सीआरडी से बचाएं. इस रिपोर्ट हम आपको इन्हीं बीमारियों के बारे में जानकारी दें. ताकि आप अपनी मुर्गियों और मुर्गी पालन के काम को इन बीमारियों से बचा सकें.

रानीखेत (Ranikhet / Newcastle Disease)
▶️ रानीखेत के ​लक्षण की बात करें तो इसमें मुर्गियां अचानक सुस्त होकर एक जगह बैठ जाती हैं.

▶️ दाना-पानी छोड़ देती हैं, हरी या पतली बीट करती हैं. गंभीर स्थिति में गर्दन मुड़ जाती है और चक्कर आने लगते हैं.

▶️ बचाव के लिए वैक्सीन लगाना जरूरी हे. ​पहला डोज: 5 से 7 दिन के चूजों की एक आंख में 1 बूंद.

▶️ ​बूस्टर डोज 21वें दिन पर दी जाती है.

▶️ बीमार मुर्गी को तुरंत स्वस्थ मुर्गियों से अलग करें.

▶️ ​पूरे शेड में मुर्गियों की मौजूदगी में रासायनिक पदार्थ का छिड़काव करें.

▶️ ​बीमार मुर्गी को 3–4 दिन एंटीबायोटिक और विटामिन B-कॉम्प्लेक्स दें व पशु चिकित्सक से सलाह लें.

कॉक्सिडियोसिस (Coccidiosis / खूनी दस्त)
▶️ ​शेड में गीला बिछावन (लिटर), गंदगी और अमोनिया गैस बनाता है.

▶️ लक्षण की बात करें तो मुर्गियों के दस्त (बीट) में खून आता है.

▶️ ​इलाज व बचाव की बात की जाए तो ​बिछावन को हमेशा सूखा रखें और नियमित सफाई करें.

▶️ बेहतर इलाज के लिए पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लें.

सीआरडी (CRD – Chronic Respiratory Disease)
▶️ ये बीमारी गीला बिछावन, अमोनिया गैस, सर्दियों में बहुत ठंडा पानी देना या सीधी ठंडी हवा लगना से होती है.

▶️ इसमें सांस लेने में तकलीफ होती है. मुंह खोलकर सांस लेना शुरू कर देती हैं.

▶️ सांस लेते समय खर-खर की आवाज आती है.

▶️ आंख व नाक से पानी बहता है.

▶️ आंखों में सूजन आ जाती है और वजन का तेजी से घटता है.

▶️ ​इलाज व प्रबंधन की बात करें तो ​बिछावन की रोजाना रैकिंग (उलट-पुलट) करें ताकि वह सूखा रखें.

▶️ ​किसी भी दवा या एंटीबायोटिक का उपयोग करने से पहले अपने नजदीकी पशु चिकित्सक से सलाह लें.

निष्कर्ष
यदि इन बीमारियों से मुर्गियों को बचा लिया तो फिर पोल्ट्री फार्मिंग के बिजनेस में काफी हद तक सफल हो सकते हैं.

Written by
Livestock Animal News Team

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