नई दिल्ली. हाल ही में गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना में आयोजित पशु मेले में पशुपालकों ने पशु पोषण से जुड़े उत्पादों में काफी रुचि दिखाई. इस बात की जानकारी खुद यूनिवर्सिटी के पशु पोषण विभाग की ओर से दी गई है. पशु पोषण विभाग की ओर से बताया गया है कि विभाग ने पशु पालन मेले में शानदार प्रदर्शन किया. जहां पशुपालकों ने पशु मेले में पशु पोषण वाले उत्पादों में रुचि ली तो वहीं विभाग ने तकरीबन 23 लाख रुपए के उत्पाद बेच दिए. विभाग की टीम ने मिनरल मिक्सचर, बाईपास फैट, यूरोमिन लिक्विड और डेयरी प्रीमिक्स जैसे ज्यादा मांग वाले उत्पादों से लगभग 23 लाख रुपए कमाए.
वाइस-चांसलर डॉ. जेपीएस गिल ने कहा कि वैट यूनिवर्सिटी के पशु पोषण विभाग ने प्रभावशाली काम किया और जो बिक्री की है वो वैट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक रूप से विकसित पोषण समाधानों में किसानों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है.
सैकड़ों पशुपालक हुए आकर्षित
▶️ उन्होंने विभाग के प्रयासों की सराहा और कहा कि “किसानों पर केंद्रित ये सेवाएं पंजाब में बेहतर चारे की गुणवत्ता जरूरी है.
▶️ साथ ही पशुओं की अधिक उत्पादकता, किसानों की बढ़ी हुई कमाई और पशुधन के टिकाऊ विकास के लिए भी इसे जरूरी बताया.
▶️ उन्होंने कहा कि वैट यूनिवर्सिटी की प्रभावशाली भागीदारी ने एक बार फिर खेती करने वाले समुदाय के लिए आधुनिक विज्ञान को व्यावहारिक लाभों से जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को उजागर किया.
▶️ पशु पोषण विभाग के प्रमुख डॉ. जेएस हुंदल ने बताया कि मुख्य आकर्षण चारे और फीड के सैंपल की मुफ्त जांच सेवा थी. जिसने सैकड़ों पशुपालकों को आकर्षित किया.
▶️ उन्होंने बताया कि ज्यादातर पशुपालकों ने पोषण संबंधी कमियों को दूर करने, पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की भी जानकारी हासिल की.
▶️ साथ ही पशुपालकों को दूध उत्पादन व फॉर्म की मुनाफा बढ़ाने के लिए चारे की गुणवत्ता और संतुलित आहार तैयार करने पर तुरंत विशेषज्ञों की सलाह और मार्गदर्शन मिल गया.
▶️ जेएस हुंदल ने कहा कि किसानों ने बातचीत में इस पहल को कुशल और मुनाफे वाली डेयरी फार्मिंग के लिए “वास्तव में गेम-चेंजर” बताया.
▶️ एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. आरएस. ग्रेवाल ने यूनिवर्सिटी के अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर, इस उपलब्धि को हासिल करने में विभाग के प्रयासों की सराहना की.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि पशुपालन में पशुओं को जब बेहतर पोषण मिलता है तो उनकी सेहत अच्छी रहती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है. जिससे इस काम में फायदा बढ़ जाता है.











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