नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने ‘नेशनल न्यूट्रिशन मंथ 2026’ के मौके पर सीनियर बेसिक खेती शाला, वाघासी, आनंद में NDDB फाउंडेशन फॉर न्यूट्रिशन (NFN) के ‘गिफ्टमिल्क प्रोग्राम’ की औपचारिक शुरुआत की. इस पहल के तहत, NDDB की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी NDDB CALF लिमिटेड की CSR पहल से समर्थित 11 सरकारी स्कूलों के 1700 छात्रों को रोजाना विटामिन A और D से भरपूर (फोर्टिफाइड) 200 ml फ्लेवर्ड दूध बांटा जा रहा है. जिसका फायदा भी छात्र और छात्राओं को मिल रहा है.
गौरतलब है कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की छात्रों के लिए शुरू की गई इस पहल का मकसद उन्हें पोषक तत्वों से भरपूर दूध देकर और पोषण की कमी को दूर करने में मदद करना है. ताकि स्कूल जाने वाले बच्चों की पोषण संबंधी सेहत को बेहतर बनाया जा सके. इस कार्यक्रम में NDDB CALF लिमिटेड के MD डॉ. राजेश नायर, आनंद तालुका के प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर RR सोलंकी, सीनियर बेसिक शाला, वाघासी के प्रिंसिपल SD जोशी, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की चेयरपर्सन वर्षाबेन, NFN की CEO स्मृति सिंह समेत कई खास मेहमान और स्कूल के छात्र व स्टाफ शामिल हुए.
दूध बांटने की पहल को बताया जरूरी
इस मौके पर बोलते हुए, NDDB के चेयरमैन ने ज़ोर दिया कि बच्चे भारत का भविष्य हैं और उनकी सेहत का ख्याल रखना जरूरी है.
बच्चों की सेहत और पोषण का ध्यान रखना देश के भविष्य के लिए एक जरूरी निवेश है, इसलिए इस तरह की पहल की शुरुआत की गई है.
उन्होंने कहा कि भारत में विटामिन A और D की कमी पोषण से जुड़ी एक बड़ी चिंता बनी हुई है, इसका हल निकालना भी जरूरी है.
साथ ही खान-पान की बदलती आदतों के कारण ऐसी कमियों को दूर करना और भी जरूरी हो गया है.
उन्होंने बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में दूध और फोर्टिफाइड दूध की भूमिका पर प्रकाश डाला.
साथ ही कहा कि ‘गिफ्टमिल्क प्रोग्राम’ जैसी पहल उनके स्वस्थ विकास में मदद कर सकती हैं और साथ ही पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता भी बढ़ा सकती हैं.
वहीं NDDB CALF लिमिटेड के MD डॉ. राजेश नायर ने ऐसी सार्थक पहलों के ज़रिए CSR ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के महत्व पर जोर दिया.
जिनका समुदायों पर सीधा असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि ‘गिफ्टमिल्क प्रोग्राम’ एक महत्वपूर्ण CSR पहल है.
जिसके ज़रिए NDDB के चेयरमैन के विज़न और मार्गदर्शन के अनुसार बच्चों की पोषण संबंधी सेहत को बेहतर बनाने के लिए संसाधन लगाए जा रहे हैं.











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