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Animal Disease: इन चार राज्यों में इस महीने ब्लैक क्वार्टर बीमारी फैलने का है खतरा, जानें क्या करें

गर्मियों में पशु बहुत जल्द बीमार होते हैं. अगर ठीक से इनकी देखरेख कर ली जाए तो हम पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं.
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. पशुपालन में अगर फायदा कमाना चाहते हैं तो पशुओं को बीमारियों से बचाना पड़ता है. अगर पशुओं की बीमारी लग जाती है तो इससे पशुपालन में नुकसान उठाना पड़ सकता है. सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है कि देश के चार राज्यों में ब्लैक क्वार्टर बीमारी पशुओं में फैल सकती है. बता दें कि ब्लैक क्वार्टर बीमारी पशुओं में होने वाली एक संक्रामक जीवाणु से होने वाली बीमारी है. इसे लंगड़ा बुखार, जहीराबाद, फडसूजन, काला बाय आदि नाम से भी जाना जाता है. आमतौर पर ये बीमारी गाय और भैंस इसके अलावा भेड़ में भी हो जाती है.

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर पशु पालक भाई पहले से सतर्क हो जाएं तो इस बीमारी से अपने पशुओं को बचा सकते हैं. क्योंकि एक बार बीमारी लग जाती है तो पशुओं के इलाज में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है. जबकि इससे उनका उत्पादन भी कम हो जाता है. वहीं पशुओं की सेहत खराब होने से भी नुकसान होता है. अगर बीमारी से बचाव पहले ही कर लिया जाए तो पशुपालक भाई खुद को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं. बीमारी का इलाज कराने पर पशुपालन की लागत बढ़ जाती है. अगर लागत कम करना है तो पशुओं को बीमारियों से बचाना चाहिए.

इन राज्यों में है खतरा
आपको बता दें कि पशुओं में ब्लैक क्वार्टर बीमारी चार राज्यों में फैलने की आशंका है. जिसमें महाराष्ट्र गुजरात राजस्थान और बिहार शामिल है. इन राज्यों के एक-एक जिले में इस बीमारी के फैलने की आशंका है. हालांकि अन्य जिले में भी पशुओं में बीमारी हो सकती है लेकिन सरकार की ओर से हाई रिस्क में चार राज्यों के एक-एक जिले को शामिल किया गया है. महाराष्ट्र में अहमदनगर को हाई रिस्क जोन घोषित किया गया है. वहीं गुजरात के बनासकांठा जिले में भी इस बीमारी के फैलने का खतरा है. राजस्थान के जैसलमेर और बिहार के शेखपुरा जिले में बैक क्वार्टर बीमारी फैल सकती है.

बीमारी से बचाव के लिए क्या करें
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीनेशन करना चाहिए. वहीं ब्लैक क्वार्टर बीमारी से बचने के लिए भी वैक्सीनेशन करना जरूरी है. अगर पशु बीमार हो जाए तो ऐसे पशुओं के आसपास सफाई करते रहना चाहिए. बीमार पशुओं का मुंह और पहले एक प्रतिशत पोटैशियम परमैगनेट के घोल से धोना चाहिए. उनके जख्मों पर एंटीसेप्टिक लोशन लगाया जा सकता है. बीमार पशुओं को अलग रखना चाहिए. उनके आसपास सफाई का खास ध्यान देना चाहिए.

Written by
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