नई दिल्ली. मॉनसून की बारिश का आगाज हो चुका है. कहीं हल्की तो कहीं ज्यादा बारिश हो रही है. आने वाले समय में बारिश और होगी. इसलिए बारिश से पहले इसकी तैयारी करना जरूरी है. यदि आप पशुपालक हैं तो बारिश से पहले खास तैयारी कर लें. क्योंकि बारिश की वजह से पशुओं को कई दिक्कतें हो सकती हैं. वहीं बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से भी मॉनसून में होने वाली तमाम परेशानियों से निपटने के इंतजाम कर लिए गए हैं. जिससे पशुपालकों को नुकसान न उठाना पड़े.
असल में बिहार में बाढ़ का असर ज्यादा दिखाई देता है. इसके चलते पशुपालन में सबसे ज्यादा समस्या पशुओं के चारे को लेकर होती है. ऐसे में आपदा प्रभावित पशुओं के जीवन की रक्षा के लिए पशु चारा वितरण कार्यक्रम की शुरुआत बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से की गई है. बता दें कि आपदा से प्रभावित पशुओं की जिंदगी की हिफाजत के लिए समय-समय पर पशु चारा वितरण कराने का कार्य जिला प्रशासन के सहयोग से जिला पशुपालन पदाधिकारी के द्वारा सम्पन्न किया जाएगा.
सरकार कितना चारा देगी
निर्धारित सहायता के अनुरूप बड़े जानवरों के लिए 70 रुपये तथा छोटे जानवर के लिए 35 रूपये प्रतिदिन सरकार की तरफ से दिया जाएगा.
आपदा ग्रस्त पशुओं के लिये सामान्यत बड़े जानवरों के लिये 6 किलो ग्राम, छोटे जानवरों के लिए 03 किलो ग्राम तथा भेड़-बकरियों के लिये 01 किलो ग्राम चारा की आवश्यकता होती है.
पशु शिविरों अस्थायी शिविरों में एक बार में तीन दिन एक सप्ताह के लिए चारा वितरण कराया जाता है तथा बाढ़ की स्थिति के अनुसार शिविर संचालन तक फिर से वितरण कराया जाता है.
वितरण प्रक्रिया की बात करें तो जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं सहयोग से शिविरों / अस्थाई शिविरों में पशुओं की संख्या के अनुसार चारा वितरण किया जायेगा.
चारा वितरण के पूर्व सभी प्रभावित पशुओं की प्रकार संख्या के आधार पर गणना कर पशुपालकवार टोकन वितरण किया जाता है तथा उक्त टोकन के आधार पर क्रमानुसार चारा का प्रबंध कर वितरित किया जाता है.
इस संबंध में विशेष जानकारी के लिए पशुपालन निदेशालय, बिहार, पटना स्थित आपदा (दूरभाष संख्या 0612-2230942) या पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, बिहार, पटना (दूरभाष संख्या 0612-2226049) से प्राप्त की जा सकती है.
निष्कर्ष
सरकार की इस मदद से आपदा ग्रस्त इलाकों के पशुपालकों को मदद मिलेगी और इससे वो पशुपालन में आने वाली इस प्राकृतिक समस्या से आसानी से निपट पाएंगे.











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