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Animal Husbandry: इस राज्य में बड़े पैमाने पर पशुओं का होगा कृत्रिम गर्भाधान, शुरू हुआ अभियान

Furthermore, the Department with cooperation of private industry has adopted a PPP approach for the establishment of Highly Pathogenic Avian Influenza (HPAI)-free poultry compartments.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. सरकार किसानों की आमदनी को दोगुना करना चाहती है. यही वजह है कि पशुपालन के काम को बढ़ावा दिया जा रहा है. जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान पशुपालन के काम को करें और उनकी इनकम बढ़ सके. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव की अगुवाई वाली सरकार भी राज्य में पशुपालन के काम को बढ़ावा देने का काम कर रही है. इसके तहत राज्य में ज्यादा उत्पादन क्षमता वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने को लेकर काम किया जा रहा है. जिसका फायदा पशुपालकों को मिलना तय है.

बता दें कि राज्य सरकार की पहल है कि पशुओं की नस्ल में सुधार किया जाए. इसके लिए सरकार की तरफ से एक अभियान चलाया जा रहा है. जिसके तहत राज्य के तकरीबन 33 फीसद से ज्यादा पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान करने का लक्ष्य रखा गया है.

सीएम ने क्या कहा
इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में पशुधन विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं.

इन संभावनाओं को एक्सप्लोर करने के लिए पशुओं का नस्ल सुधार एक सशक्त माध्यम है. इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर हिरण्यगर्भा अभियान चलाया जा रहा है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश में अगले पांच सालों में कृत्रिम गर्भाधान का कवरेज 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

इसके तहत चालू वित्त वर्ष में कुल मादा पशुओं में से 28.04 लाख (लगभग 33 प्रतिशत) गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

अप्रैल से नवम्बर 2025 के बीच प्रदेश में 11.76 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराकर उल्लेखनीय प्रगति हासिल की गई है.

क्या हैं एआई के फायदे
कृत्रिम गर्भाधान के फायदे की बात की जाए तो इससे उच्च गुणवत्ता वाले नर का सीमेन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे अच्छी नस्ल के बछड़े या बछड़ी पैदा होते हैं.

इस तकनीक से यौन संचारित बीमारी के फैलने का खतरा भी बेहद कम हो जाता है और झुंड स्वस्थ रहता है.

वहीं महंगे प्रजनन सांडों को रखने और उनकी देखभाल करने का खर्च भी जीरो हो जाता है और पशुपालन की लागत कम आती है.

ऐसे पशुओ को भी गर्भित किया जा सकता है, जो प्राकृतिक रूप से किसी दिक्कत से जूझ रहे हैं.

Written by
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