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Animal Husbandry: कृत्रिम गर्भाधान का सही समय क्या है, किन बातों का रखना चाहिए ख्याल, पढ़ें यहां

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. सही समय का सेलेक्शन कृत्रिम गर्भाधान का एक बेहद अहम पहलू है. एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 30 प्रतिशत पशुओं का गलत समय पर कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है. गांवों में ऐसा भी पाया गया है कि मद या फिर गर्मी समाप्त होने के बाद पशु का गर्भाधान किया जाता है. इसकी वजह से रिजल्ट सही नहीं आता है. एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं के बार बार फिरने या फिर गर्भधारण न करने की एक बहुत बड़ी वजह उनका गलत समय पर गर्भाधान करना होता है, इसीलिए हर एक पशुपालक को इसकी सही जानकारी होनी चाहिए.

एक्सपर्ट के मुताबिक गाय भैंस के मदकाल में रहने की औसत अवधि लगभग 12-24 घंटों की होती है. फ्रोजन सीमन के स्पर्म लगभग 20 घंटे तक ही इस्तेमाल के लिए सही होते हैं. इन पहलुओं को अगर ध्यान में रखा जाए तो पता चलता है की पशुओं को गर्भित करने का उपयुक्त समय मदकाल की मद अवस्था से लेकर मदकाल की देर की अवस्था (8-16 घंटे मदकाल की शुरुआत होने के बाद) होती है. किसान भाईयों के लिए एक सरल नियम यही है कि यदि गाय सुबह गर्मी में आयी है तो उसे शाम को गर्भाधान करवाना चाहिए. वहीं शाम या रात को मदकाल में आयी है तो अगले दिन सुबह गर्भाधान करवाना चाहिए.

कब कराना चाहिए गर्भाधान
ज्यादातर मामलों में पशु के मदकाल के शुरू होने का वक्त और पशुपालक का उसे पहचानने का वक्त अलग अलग होता है. ऐसी स्थिति में पशुपालक को पशु जब भी मदकाल में दिखे उसे तुरंत पशु का गर्भाधान कराना चाहिए तथा 12 घंटे के बाद दोबारा गर्भाधान करा देना चाहिए. ऐसा करने से गर्भधारण दर में बढ़ोतरी होती है. गाय लगभग 12-18 घंटे मदकाल में रहती है. मदकाल की इस अवस्था के दौरान ही गाय को गर्भित कराना चाहिए. गांव में अक्सर ऐसा देखा गया है की पशुपालक अपने पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान अनट्रेंड या कम अनुभवी व्यक्ति से करवा लेते हैं. जिन्हें इस तकनीक की सही जानकारी नहीं होती.

ट्रेंड लोगों से ही कराएं कृत्रिम गर्भाधान
ऐसे लोग किसी गैर सरकारी संस्था से छोटी अवधि का प्रशिक्षण लिए हुए होते हैं जिनका तकनीकी ज्ञान बेहद कम होता है. इस तरह के लोगों द्वारा किया गया गर्भाधान अक्सर असफल हो जाता है. ऐसे अकुशल व कम अनुभवी व्यक्ति पशुओं के जननांगो को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं और पशु के विभिन्न रोगों से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है. कृत्रिम गर्भाधान की कम सफलता दर का ये बहुत बड़ा कारण है. कृत्रिम गर्भाधान सही समय पर सही तकनीक द्वारा एक प्रशिक्षित एवं अनुभवी व्यक्ति से ही कराना चाहिए.

ये गलती कभी भी न करें
सीमेन की सुरक्षा एवं सर्वोत्तम गुणवत्ता बनाये रखने के लिए उसे हमेशा तरल नाइट्रोजन कन्टेनर में रखा जाना चाहिए तथा गर्भाधान के वक्त ही उसे निकालकर प्रयोग किया जाना चाहिए. ऐसा पाया गया है की कुछ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन सीमेन की स्ट्रॉ को कंटेनर से निकालकर अपनी जेब, थर्मस, बर्फ अथवा पानी में रखकर पशुपालक के घर जाते हैं और उनके पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान करते हैं. ऐसे सीमेन की गुणवत्ता बेहद खराब होती है और ऐसे सीमेन से किया गया गर्भाधान अक्सर असफल हो जाता है. पशुपालक हमेशा ध्यान रखे की कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन तरल नाइट्रोजन कन्टेनर से निकाले हुए वीर्य के स्ट्रों को ही प्रयोग में लाये तथा जेब, थर्मस, बर्फ अथवा पानी में रखे हुए वीर्य के प्रयोग को कभी भी इजाजत न दें. इस सन्दर्भ में पशुपालकों की जागरुकता भी जरूरी है.

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