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Animal Husbandry: दूध का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए घर पर कैसे तैयार करें मिनरल मिक्सचर, जानें यहां

सीता नगर के पास 515 एकड़ जमीन में यह बड़ी गौशाला बनाई जा रही है. यहां बीस हजार गायों को रखने की व्यवस्था होगी. निराश्रित गोवंश की समस्या सभी जिलों में है इसको दूर करने के प्रयास किया जा रहे हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मिनरल पोषण डेयरी पशुओ के लिए बहुत अहम होता है. मिनरल पशु पोषण के पांच पिलर में से एक है. मिनरल 2 तरह के होते हैं. एक मैक्रो मिनरल जो अधिक मात्रा में चाहिए होते हैं जैसे, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम आदि और दूसरे माइक्रो मिनरल जो कम मात्रा में चाहिए होते हैं. माइक्रो का मतलब ये नहीं है कि इन मिनरल की अहमियत कम होती बल्कि इनकी जरूरत ही शरीर के अन्दर बहुत कम होती है और इन सबकी जरूरत मिनरल मिक्सचर से पूरी की जाती है.

मिनरल मिक्सचर का पशु के स्वास्थ में जो महत्त्व होता है वह किसी से ढका छुपा नहीं है, लेकिन मिनरल मिक्सचर के अधिक दाम किसानों के मिनरल का लाभ नहीं उठाने देते हैं. यही वजह है कि इस आर्टिकल में हम आपको मिनरल मिक्सचर को घर पर कैसे बनाएं, उसके बारे में बताने जा रहे हैं. एनिमल एक्सपर्ट डॉ. इब्ने अली का कहना है कि पशु के आहार में लगातार मिनरल देने से न सिर्फ पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. बल्कि उत्पादन को बढ़ा कर भी पशु की प्रजनन क्षमता को भी दुरुस्त कर देता है.

प्योर साल्ट्स की होती है जरूरत
डॉ. इब्ने अली के मुताबि मिनरल मिक्सचर बनाने के लिए फीड ग्रेड के प्योर साल्ट्स की जरूरत होती है. बाजार में कई तरह के मिनरल्स मिलते हैं जिनमे एनालिटिकल से लेकर फर्टिलाइजर ग्रेड तक के मिनरल साल्ट्स मिलते हैं. इसी हिसाब से इनके रेट्स भी होते होते हैं. एनालिटिकल ग्रेड सबसे महंगा और फर्टिलाइज़र सबसे सस्ता होता है. कई बार लोग सस्ते के चक्कर में या अनजाने में फर्टिलाइज़र ग्रेड के केमिकल ले लेते हैं जो फायदे की जगह नुकसान कर देते हैं. क्योंकि उनमें अन्य केमिकल की इम्पुरिटी पाई जाती है जो की पशु को नुक्सान पहुंचा सकती है. फीड ग्रेड के साल्ट इस्तेमाल करना ठीक रहता है.

इस तरह करें तैयार
एक बार साल्ट लेने के बाद फिर उनके अन्दर प्योर एलिमेंट का पता लगाना होता है. जैसे फेरस सलफेट में आयरन की मात्रा कुल 20 फीसदी होती है. यदि हमें मिनरल मिक्सचर में 20 ग्राम आयरन चाहिए तो हमें 100 ग्राम फेरस सलफेट मिलाना होगा. उसके बाद मसला आता है, बायो अवेलेबिलिटी का, जिसका मतलब होता है कि खून में कितना अवशोषित होता है. यदि फेरस सलफेट में आयरन की बायो अवेलेबिलिटी 80 फीसदी है तो 20 फीसदी आयरन सलफेट और बढ़ाना पड़ेगा. इसी तरह सब मिनरल्स की जरूरत ऐसे ही पता चलती है.

Written by
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