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Dairy: देशी ट्रिक से बढ़ाएं दूध, खर्चा भी बेहद कम

पशुपालन में दूध बढ़ता है. इससे एनर्जी भी मिलती है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. पशुपालन में दुधारू पशु की वैल्यू होती है. वहीं अच्छी नस्ल और अच्छी फसल की कहावत पशुपालन में मायने रखती है. हर पशुपालक चाहता है कि उसका पशु अच्छा दूध दें, इसके लिए, अपने पशुओं में दूध बढ़ाने के लिए हर पशुपालक कई तरह के प्रयास करते हैं. ताकि मुनाफा कमा सकें. हरियाणा का एक बहुत ही पुराना फॉर्मूला है, जिसका इस्तेमाल करके आप अपने पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं. आइये इसके बारे में जानते हैं. बता दें कि अगर इस फॉर्मूले का उपयोग करेंगे तो पशुओं का दूध सौ फीसदी बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ ही उसका कोई भी कोई भी नुकसान भी नहीं है.

कई लोग पान के अंदर गुलकंद मिलाकर खाते हैं. इसी गुलकंद से पशुओं का दूध बढ़ सकता है. गुलकंद के अंदर गुलाब की पत्तियां, इलायची, शहद और चीनी का इस्तेमाल किया जाता है. इसी को मिलाकर गुलकंद तैयार किया जाता है. गुलकंद को आप घर पर ही तैयार कर सकते हैं कोई केमिकल नहीं डालना है यह किसी तरीके से नुकसान भी नहीं करेगा.

सारी चीजों को मिलाकर बनाइये फार्मूला: गुलाब की पत्तियां, इलायची, शहद, चीनी इन चीजों को मिलाकर धूप में रख देने से 7 से 10 दिन के अंदर गुलकंद तैयार हो जाता है. गुलकंद तैयार करने के लिए 700 ग्राम गुलाब की पत्तियों लेनी होती है. 20 ग्राम इलायची का हरा वाला ऊपरी हिस्सा. इसमें 2 किलो चीनी और 200 ग्राम अच्छी क्वालिटी का शहद डाल दिया जाए. इन सबको डालकर इनको मिक्स कर दिया जाए और धूप में रख दिया जाए. इससे गुलकंद तैयार हो जाएगा. इससे पशुओं का दूध बढ़ जाएगा. इसका कई और फायदा भी है. पशुओं को अक्सर इंफेक्शन हो जाता है.

जानिए कब खिलाएं: गुलकंद तैयार करने के बाद आपको ये पता होना चाहिए कि किस समय पशुओं को ये खिलाया जाए. ताकि दूध उत्पादन बढ़ जाए. डिलीवरी के बाद पशुओं को गुलकंद खिलाया जाना चाहिए. एक एडल्ट पशु है और वो गाय है तो 200 ग्राम गुलकंद खिलाया जाना चाहिए. भैंस है तो 300 ग्राम खिलाया जाए. सुबह 9:00 बजे के करीब पशुओं को खिलाया जाए. हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है की डिलीवरी के 3 दिन बाद पशुओं को गुलकंद खिलाना चाहिए. इस प्रक्रिया को 10 से 15 दिन अपनाना चाहिए. इससे पशुओं का दूध उत्पादन बहुत तेजी के साथ बढ़ जाएगा. पशुओं की योनि से सफेद द्रव जैसा कुछ डिसचार्ज होता है. ये गुलकंद से ठीक हो सकता है. पशुओं का मैला निकलने की प्रक्रिया भी सही से हो जाती है. उनका दूध का उत्पादन बढ़ जाता है.

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