नई दिल्ली. भैंस, भेड़ और बकरी पालन को दोहरे उद्देश्य के लिए पाला जा सकता है. भैंस, भेड़ और बकरी तीनों से ही दूध भी मिलता है और ये मीट उत्पादन के लिए सही हैं. अगर भैंस से बछड़ा मिलता है तो उसे स्लाटर हाउस भेजा जा सकता है. जबकि भैंस जब दूध देना बंद कर देती है तब भी वो मीट उत्पादन के काम में आ जाती है. जबकि भेड़ से ऊन का उत्पादन होता है और मीट का भी. इसलिए भैंस और भेड़ पालकर पशुपालकों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है.
हाल ही में पशुओं की नई नस्लों को मान्यता देने वाली संस्था नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (NBAGR) ने कई और पशुओं की नस्ल को मान्यता दी है. इस संस्था ने पशु-पक्षियों की कुल 16 नस्लों पर मुहर लगाने का काम किया है. उन्हीं में से हम यहां आज भैंस की एक और भेड़ की एक नस्ल के बारे में जानकारी देंगे. क्योंकि संस्था की ओर से एक भैंस और एक भेड़ की नस्ल को मान्यता दी गई है.
मेलघाटी भैंस की खासियत जानें
यह नस्ल महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में पाई जाती है. इन जानवरों का रंग काला और बालदार होता है.
इनका माथा चौड़ा (गुंबद के आकार का), चेहरा लंबा और पतला, नाक की हड्डी नुकीली और आंखें उभरी हुई होती हैं.
सींग शरीर के समानांतर होते हैं, पीछे की ओर मुड़े हुए, ऊपर अंदर की ओर नुकीले होते हैं.
मेलघाटी भैंस एक दिन में औसतन 4 किलो दूध देती है, और सबसे ज्यादा दूध 10 किलो प्रति होता है.
दूध में फैट 7 फीसद तक होता है. इन भैंसों की आबादी लगभग 28 हजार है.
अविशान भेड़ के बारे में जानें
अविशान, पहली सिंथेटिक भेड़ नस्ल ICAR-CSWRI द्वारा विकसित की गई है. ये नस्ल ज्यादा बच्चे पैदा करने की क्षमता रखती है.
ज्यादा दूध का उत्पादन करती हैं और मुश्किल मौसम की स्थितियों में ढलने की क्षमता इनमें होती है.
इस कंपोजिट क्रॉस में 12.5 फीसद गारोल, 37.5 परसेंट मालपुरा और 50 फीसद पाटनवाड़ी वंशानुक्रम है. FecB जीन भी गारोल से लिया गया है.
ये मध्यम से बड़े आकार की भेड़ होती हैं. चेहरा हल्के से गहरे भूरे रंग का होता है जो गर्दन तक फैला होता है.
शरीर के बालों का रंग ऑफ-व्हाइट क्रीम रंग का होता है. इसकी नाक रोमन टाइप की होती है और कान चपटे होते हैं.
पूंछ पतली और मध्यम लंबाई की होती है. नर और मादा दोनों में सींग नहीं होते हैं. वयस्क नर का शारीरिक वज़न 38 से 64 किलोग्राम तक होता है.
बच्चों की औसत संख्या 1.8 होती है. ऊन मोटे टाइप का होता है. ये राजस्थान के टोंक जिले में पाई जाती है. अनुमानित आबादी लगभग 8.5 हजार है.












