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Animal Husbandry: पशुपालन में क्या है ग्रीनहाउस गैसें, क्या पड़ता है इसका असर, जानें यहां

पशु को पानी से भरे गड्ढे में रखना चाहिए या पूरे शरीर को ठंडा पानी का छिड़काव करते रहना चाहिए. शरीर के तापमान को कम करने वाली औषधि का प्रयोग भी कर सकते हैं.
पानी में खड़ी भैंसों की तस्वीर.

नई दिल्ली. डेयरी कारोबार के लिए भैंस पालना ज्यादा फायदेमंद है या फिर गाय, ये अहम सवाल है. इसको लेकर एनिमल एक्सपर्ट कहते हैं कि गाय के मुकाबल भैंस का पशुपालन ज्यादा फायदा पहुंचाने वाला है. क्योंकि भैंस के दूध में गाय के दूध से ज्यादा फैट होता है. इसके चलते इसे लोग ज्यादा पसंद करते हैं. फैट ज्यादा होने की वजह से डेयरी प्रोडक्ट बनाना आसान होता है. एक्स्पर्ट के मुताबिक भैंसें कम देखभाल के बावजूद ज़्यादा दूध देती हैं. यानि उनकी ज्यादा देखभाल करने की जरूरत नहीं होती है. वहीं भैंसें कम गुणवत्ता वाले चारे को भी अच्छी तरह से खा लेती हैं और दूध का उत्पादन करती हैं.

यही वजह है कि एक अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक भैंसों का मानव जनसंख्या दोगुनी होने का अनुमान है. जनसंख्या वृद्धि और पशु उत्पाद की खपत के चलते पशु उत्पादों की मांग भी बढ़ने का अनुमान है. जिसके नतीजे में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि भी हो सकती है. इससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि बावजूद इसके अगर डेयरी कारोबार शुरू करने वालों के लिए भैंस एक बेहतरीन विकल्प है. भैंस पालने की वजह से ज्यादा कमाई की जा सकती है.

बीमारियों का खतरा रहता है कम
दुनिया भर में, विशेषकर विकासशील देशों में, पशु प्रोटीन और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ रही है. दुनिया की बढ़ती आबादी के पोषण के लिए अधिक भोजन का उत्पादन करते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने की आवश्यकता है. जिसका भविष्य में “जलवायु-स्मार्ट पशुधन”, विशेष रूप से भैंस, एक समाधान हो सकती है. भारत में भैंसों की आबादी दूध उत्पादन में प्रमुख योगदान देती है और गर्म जलवायु परिस्थितियों में मवेशियों की तुलना में भैंसों में थनैला परजीवी संक्रमण जैसी बीमारी कम होती है.

ग्रीन हाउस गैंसों का भी है खतरा
दूध उत्पादन की स्थिरता की अपेक्षित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, क्योंकि भविष्य में गर्मियों में अत्यधिक तापमान होने की संभावना है, छोटे और सीमांत किसानों द्वारा पशुधन के प्रबंधन के तरीके और उनके समर्थन के लिए अब तक विकसित की गई नीतियों को संशोधित करना जरूरी है. इसके बाद सभी देशों को ग्रीन हाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन को कम करना होगा, फिर भी, ये कारक छोटे पशुधन उत्पादकों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे. पशु-सोर्स वाले भोजन की मांग में अनुमानित इजाफे को पूरा करने के लिए, इस क्षेत्र को पूंजी, जल, भूमि और ऊर्जा जैसे संसाधनों के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा.

ग्रीन हाउस गैसों के असर को समझना है जरूरी
पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद गैसों की स्ट्रक्चर का जलवायु परिवर्तन पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है. हालांकि, इनमें से कुछ प्रभाव प्रत्यक्ष हैं, अन्य अप्रत्यक्ष हैं, जिसके कारण पृथ्वी की जलवायु प्रणाली में मुश्किलल क्रियाएं होती रहती हैं. जलवायु परिवर्तन हमारे समय के सबसे गंभीर मुद्दों में से एक है, जिसका हमारे ग्रह और आने वाली पीढ़ियों पर दूरगामी परिणाम होगा. कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें हैं. जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए ग्रीनहाउस प्रभाव की कान्सेप्ट को समझना जरूरी है.

Written by
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