Home पशुपालन Animal News: गडवासु ने बताया पशुपालन में कैसे कर सकते हैं पराली का इस्तेमाल, इसके फायदे भी गिनाए
पशुपालन

Animal News: गडवासु ने बताया पशुपालन में कैसे कर सकते हैं पराली का इस्तेमाल, इसके फायदे भी गिनाए

गडवासु के कार्यक्रम में बोलते हुए एक्सपर्ट.

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिट, लुधियाना में फसल अवशेष प्रबंधन पर एक अहम बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में कुलपति डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने पशुपालन में पराली के फायदों को गिनाया और बताया कि कैसे पराली के इस्तेमाल से पशुपालन में फायदा बढ़ाया जा सकता है और पराली को जलाने से रोकर प्रदू​षण को भी कम किया जा सकता है. डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने कहा कि पशुपालन में भी पराली का उपयोग काफी किफायती साबित हो रहा है.

इस बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट भी शामिल हुए और चर्चा के दौरान, अवशेष प्रबंधन, पराली जलाने की रोकथाम और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों पर खुली चर्चा हुई. डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल, निदेशक प्रसार शिक्षा ने अतिथियों का स्वागत किया और इस समसामयिक समस्या का अवलोकन प्रस्तुत किया.

पराली के फायदे यहां पढ़ें
वहीं जतिंदर पाल सिंह गिल ने कहा कि पशुओं के लिए भूमि पर बिछाने के लिए पराली बेहतर है. भूसे की जगह पराली के उपयोग ने बहुत अच्छे परिणाम दिए हैं.

पराली पर अगर पशुओं को रखा जाता है तो पशुओं के पेशाब और गोबर से पराली को धीरे-धीरे जैविक खाद के रूप में बदला जा सकता है.

उन्होंने कहा कि खाद खेतों में डाली जाती है. जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है.

वहीं पराली को यूरिया के घाल से उपचारित करके प्रोटीन और पाचन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है.

पराली को साइलेज के तौर पर भी संरक्षित किया जा सकता है, जो पशुओं को ऊर्जा और पोषण देता है चारे के खर्च को कम करता है.

अटारी संस्थान के निदेशक डॉ. परवेंद्र शेरोन ने इस बात की सराहना की कि पंजाब के किसानों ने खेतों में पराली जलाने के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता दिखाई है, जिसके कारण पिछले वर्ष की तुलना में इस घटना में 40 प्रतिशत की कमी आई है.

डॉ. एम. एल. जाट नेसभी हितधारकों से कहा कि सामूहिक प्रयासों के बिना हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते.

उन्होंने कहा कि हमें पांच मुख्य मुद्दों पर काम करना चाहिए जिनमें फसल अवशेषों का उचित उपयोग, कौशल विकास, कम लागत वाली विधियां, मृदा नमूनाकरण और भूमि पर अवशेषों के प्रभाव पर विचार करना महत्वपूर्ण है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

CIRB will double the meat production in buffaloes, know what is the research on which work is going on. livestockanimalnews animal Husbandry
पशुपालन

Animal Husbandry: पशु की आंख से निकल रहा है पानी तो खुद न करें इलाज, इसे हल्के में भी न लें

नई दिल्ली. पशुपालन में पशुओं की देखरेख के दौरान कई बार आपने...

पशुपालन

Animal Disease: लंपी स्किन डिजीज पर यूपी ने पा लिया काबू, समय पर इलाज से जल्द ठीक हो रहे पशु

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग के रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र...

Animal Husbandry: Milk animals can become sick in extreme cold, adopt these methods to protect them from diseases.
पशुपालनसरकारी स्की‍म

Scheme: पशुधन बीमा पोर्टल से पशुपालकों को पशुधन ​बीमा लेना होगा आसान, इसके हैं कई फायदे

नई दिल्ली. मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय...