नई दिल्ली. पशुपालन में न सिर्फ दवाएं बल्कि देसी नुस्खे भी बहुत काम करते हैं. कई बार तो छोटी-बड़ी समस्याओं को इन्हीं नुस्खों की मदद से दूर किया जाता है. पहले जब पशु चिकित्सा का इतना ज्यादा विस्तार नहीं हुआ था तो देसी नुस्खों से काम चलाया जाता था, आज भी बहुत से पशुपालक देसी इलाज से ही पशुओं की बीमारियों का इलाज करते हैं. हालांकि एक जिम्मेदार प्लेटफॉर्म होने के नाते हम आपको ये सलाह देंगे कि पशु चिकित्सक की सलाह भी बेहद अहम होती है. उनके बताए तरीकों को प्राथमिकता देनी चाहिए.
हालांकि कुछ मामूली दिक्कतों से निपटने के लिए देसी नुस्खों का कोई तोड़ नहीं है. कई पशुपालक बताते हैं कि नींबू और फिटकरी से कई समस्याओं खत्म किया जा सकता है. जिससे पशुपालकों को फायदा हो सकता है. आइए जानते हैं, इसके बारे में.
क्या काम आता है नींबू और फिटकरी
छोटे घाव या कट पर फिटकरी का उपलयोग हल्का एंटीसेप्टिक antiseptic का काम करता है. जबकि नींबू सफाई में मदद करता है.
खुर की हल्की सड़न या बदबू में पानी में फिटकरी मिलाकर धोना उपयोगी है.
जोक या कीड़े वाले छोटे घाव में सफाई के लिए सहायक है.
मुंह की बदबू या हल्के infection में बहुत हल्का घोल बनाकर बाहरी सफाई में उपयोग किया जा सकता है.
सिर्फ बाहरी उपयोग के लिए तैयार करने का तरीके की बात करें तो एक गिलास साफ पानी ले लें.
इसके अंदर चुटकी भर फिटकरी डालें और 4-5 बूंद नींबू का रस मिलाएं.
अच्छी तरह मिलाकर घाव या फिर खुर को हल्के से धोएं या साफ करें.
हालांकि खुले, गहरे या बड़े घाव पर नींबू लगाने से जलन और टिशू डैमेज हो सकता है.
ज्यादा फिटकरी इस्तेमाल करने से त्वचा सूख सकती है और जलन हो सकती है.
आंख, थन के अंदर, कान के अंदर, जननांग के अंदर कभी न लगाएं.
बिना डांक्टर सलाह के इसे कभी अंदर से पिलाने या इंजेक्शन की जगह उपयोग न करें.
बुखार, खून आना, दूध कम होना, जहर, गलघोंटू, FMD जैसी बीमारी में ये इलाज नहीं है.
फायदों की बात करें तो सफाई में मदद करता है. दुर्गध कम करने में सहायक है.
निष्कर्ष
याद रखें कि देसी नुस्खे केवल सहायक हैं, इलाज का विकल्य नहीं हैं. किसी भी गंभीर समस्या में पशु चिकिसक से संपर्क करना बेहद ही जरूरी होता है. क्योंकि पशु चिकित्सा अब बहुत बेहतर है और घर-घर इलाज मुहैया कराया जा रहा है.












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