नई दिल्ली. पशुपालन के एक्सपर्ट का कहना है कि पशुपालन में कामयाब होने का सबसे मजबूत सूत्र ये है कि पशुओं को बीमार न होने दिया जाए. क्योंकि जब पशु बीमार होता है तो इससे सबसे पहले उत्पादन पर असर होता है. वहीं पशु बीमार होकर कमजोर भी हो जाता है. इससे पशुपालन की लागत बढ़ जाती है. असल में पशुओं के इलाज पर अतिरिक्त खर्च करना होता हे. जिससे पशुपालन के काम में मुनाफा भी कम हो जाता है. इसलिए बेहद ही जरूरी है कि पशुओं को किसी भी हालत में बीमार न होने दिया जाए.
एक्सपर्ट का कहना है कि यदि आप चाहते हैं कि आपका पशु बीमार न हो तो उसकी हर एक हरकत पर नजर रखें. मसलन वो कितना पानी पी रहा है. कम क्यों पी रहा है. पेशाब कितनी बार करता है. उसके रंग में तो कोई बदलाव नहीं है. वहीं पशु के तामपान का भी ध्यान देना चाहिए.
कितना पानी देना चाहिए
पशु के स्वस्थ रहने के लिए उसके पास हर समय स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध होना चाहिए.
एक लीटर दूध देने के लिए पशु को 3-5 लीटर पानी की जरूरत होती है.
गर्मी के मौसम में पानी की जरूरत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
पशु के दूध उत्पादन में कमी, पानी नहीं पीना, ज्यादा पानी पीना जिससे उसके मूत्र में रक्त आने लगे या मूत्र कॉफी के रंग का हो, तो यह स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत है.
पेशाब कितनी बार करता है
एक पशु दिन में लगभग 10 पेशाब करता है. पेशाब की मात्रा पशु के वजन पर निर्भर करती है.
350-400 किलो के एक पशु को दिन भर में 8.5-10 लीटर पेश करना चाहिए.
पेशाब की मात्रा में कमी, पेशाब के रंग में बदलाव या पेशबा करने में परेशानी स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत हैं.
तापमान के बारे में भी जानें
पशु के शरीर का सामान्य तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए.
तापमान सुबह जल्दी या देर शाम रात के दौरान लिया जाना बेहतर होता है.
बुखार होने पर सांस तेज चलती है और शरीर में कंपकपी हो सकती है.
बुखार में कान, सींग और पैर छूने पर ठंडे लगते है, जबकि शरीर बहुत गर्म रहता है.
निष्कर्ष
इन बातों पर ध्यान देते हैं तो पशुओं को बीमार होने से बचा पाएंगे. साथ ही पशु पालन में नुकसान से भी खुद को बचा पाएंगे.










