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Animal Husbandry: इस तरह सालभर मिलेगा पशुओं को हरा चारा, जानें कब क्या करना है

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प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. डेयरी फार्मिंग में पशुओं का दूध उत्पादन करना बेहद ही जरूरी है. इसके लिए पशुओं को हरा चारा देने भी बेहद ही जरूरी है. जबकि सालभर हरा चारा उपलब्ध होना मुश्किल काम है लेकिन कुछ तरीके हैं जिससे सालभर पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध हो सकता है. इसी के बारे में हम यहां आपको जानकारी देने जा रहे हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि मई-जून माह में मक्का, ज्वार, बाजरा आदि सितम्बर-अक्टूबर में बरसीम सरसों, जई, फरबरी-मार्च माह में मक्का के साथ लोबिया बोया जा सकता हैं. यदि इस तरीके से हम फसलों को बोएंगे तो एक चारा समाप्त होने से पहले दूसरा चारा तैयार हो जाएगा.

एक्सपर्ट कहते हैं कि इसके लिए हमें दो चीजों की आवश्यकता पड़ेगी एक तो जमीन पर्याप्त हो और दूसरा पानी का साधन अच्छा हो यदि इनमें किसी भी चीज की कमी है तो हम समय क्रम को नहीं अपना सकते हैं. पशु पालर्को को ध्यान रखना चाहिए की ज्वार का हरा चारा बुवाई के बाद जल्दी नहीं खिलाना चाहिए कम अवधि वाले पौधों में ग्लूकोससाइड होता जिसे धूरिन भी कहते है वह पशु के पेट में जाकर पूसिक या हाइड्रोसायनिक अम्ल के रूप में बदल जाता है.

ज्वारा की बुवाई में सावधानी
ज्वार की बुवाई के 30 दिन की उम्र वाले पौधों तथा जमीन की सतह के पास नई शाखाओं में यह अम्ल बहुत अधिक मात्रा में होता है. पेंडी वाली फसल भी छोटी अवस्था में पशुओं के लिए जहरीली होती है. फसल को फुल लगने के समय काटा जाना चाहिए. ग्लूकोसाइड पत्तियों में तर्नी का अपेक्षा अधिक मात्रा में होता है. यदि ज्वार की बुवाई के समय नत्रजन वाली उर्वरको की अधिक मात्रा खेल में दाल दी जाए तो कम उम्र वाले पौधों में नाइट्रेट अधिक मात्रा में जमा हो जाता हैं तथा धूरिन की मात्रा भी बढ़ जाती है. सूडान घास में ग्लूकोसाइड ज्वार की अपेक्षा बहुत कम होता है.

पानी लगाने के बाद चारा खिलाएं
30 दिन के ज्वार के पौधे में ग्लूकोसाइड इतनी अधिक मात्रा में जमा रहती है कि यदि गाय को 4-5 किग्रा. हरा चारा खिला दिया जाए तो उसकी मृत्यु तक हो सकती है. ऐसी फसल में जिसमें पानी की कमी रही हो धूरिन की मात्रा बढ़ जाती है. इसलिए पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे फसल की अवस्था (40-45 दिन बुवाई के बाद) को ध्यान में रखकर ही पशुओं को खिलाएं यदि बरसात न हुई तो फसल में कम से कम दो पानी लगाने के बाद ही पशुओं को खिलाएं. क्योंकि पानी लगाने से हाइड्रोसाइनिक अम्ल जड़ों के माध्यम से घुलकर जमीन में चला जाता है.

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