नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग (Department of Animal Husbandry, UP) के एक्सपर्ट का कहना है कि पशुपालन में पशुओं को बीमारियों से बचाना बेहद ही जरूरी होता है. क्योंकि बीमारियों की वजह से पशुओं की सेहत खराब हो जाती है. इससे उनकी मौत होने का भी खतरा बढ़ जाता है. जबकि ऐसा न भी हो तो भी प्रोडक्शन पर बेहद ही खराब असर पड़ता है. इससे प्रोडक्शन कम हो जाता है और पशुपालन के काम में नुकसान उठाना पड़ता है. सरकार भी इस बात को समझती है, यही वजह है कि पशुओं को मुफ्त वैक्सीन और दवाएं वगैरह दी जाती हैं.
केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें ऐसा कई काम कर रही हैं, जिससे पशुओं को बीमारियों से बचाया जा सके. ताकि इससे पशुपालकों को नुकसान न हो. वहीं पशु ज्यादा से ज्यादा दूध का उत्पादन करे और जिससे पशुपालकों को मुनाफा ज्यादा हो.
सरकार की योजना का मिल रहा फायदा
उत्तर प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार की सम्मिलित योजना तहत पशुपालकों के द्वार पर टोल फ्री नंबर 1962 के माध्यम से पशुओं का उपचार एवं टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
साथ ही वाहनों पर उपलब्ध पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से योजना का व्यापक प्रसार प्रचार भी किया जा रहा है.
अधिकारियों ने बताया कि ग्राम पंचायत, पशु चिकित्सालय और पशु सेवा केंद्रों पर किसानों के मध्य योजना के व्यापक प्रचार प्रसार हेतु वॉल पेंटिंग आदि भी कराई जा रही है.
बताते चलें कि प्रदेश में मोबाइल वेटरिनरी यूनिट के कुल 520 वाहन क्रियाशील है.
हाइब्रिड मोड में वेटरिनरी यूनिट के 50 प्रतिशत वाहन निर्धारित रूट पर तथा 50 प्रतिशत इमरजेंसी रूट पर संचालित किए जा रहे हैं.
निर्धारित रूट के वाहनों द्वारा न केवल निर्धारित कैंप के माध्यम से टीकाकरण, कृमिनाशक, दवापन, चिकित्सा एवं सर्जरी आदि की सुविधा पशुपालक के द्वार प्रदान की जा रही है.
वहीं निर्धारित रूट पर संचालित गौशालाओं का भ्रमण कर निरक्षित गोवंश का भी स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है.











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