नई दिल्ली. दुनियाभर के तमाम देशों के मुकाबले भारत में सिर्फ 3 लाख करोड़ गोजातीय पशु हैं. इसका फायदा देश को मिल सकता है. दरअसल, वर्ल्ड बायोगैस एसोसिएशन इंडिया कांग्रेस 2025 के इंडिया हैबिटेट सेंटर नई दिल्ली में हुई प्लेनरी सेशन में इसी मसले पर चर्चा हुई. जहां भारत को बायोगैस के हब के तौर पर स्थापित करने पर एक्सपर्ट ने अपनी राय रखी. यहां क्लाइमेट सॉल्यूशन में ग्लोबल लीडर के तौर पर देश की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया गया. चर्चाओं का फोकस एनर्जी सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन, वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकॉनमी पाथवे के एक जरूरी ड्राइवर के तौर पर बायोगैस पर था.
पैनल ने पॉलिसी फ्रेमवर्क को मज़बूत करने, ग्लोबल पार्टनरशिप को गहरा करने और टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट मॉडल को आगे बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया, जो भारत को ग्लोबल बायोगैस हब के तौर पर स्थापित करेगा. इस सेशन की अध्यक्षता वर्ल्ड बायोगैस एसोसिएशन (WBA) की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर शार्लोट मॉर्टन OBE ने की और इसमें भारत सरकार के पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के सेक्रेटरी पंकज जैन, NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मैरी बर्स वारलिक, इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) की डिप्टी डायरेक्टर जनरल गौरी सिंह जैसे जाने-माने स्पीकर्स ने की.
क्लाइमेट और ग्रामीण विकास को मिल रहा है सपोर्ट
यहां डॉ. शाह ने कहा कि भारत में 300 मिलियन से ज्यादा गोजातीय जानवर हर साल 1,653 मिलियन मीट्रिक टन खाद बनाते हैं. क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को आगे बढ़ाने का एक बेमिसाल मौका देता है.
उन्होंने कहा कि अकेले इस रिसोर्स में देश की खाना पकाने के फ्यूल की आधी जरूरतों को पूरा करने, 40 परसेंट फर्टिलाइजर की जरूरतों को पूरा करने और मीथेन एमिशन को काफी कम करने की क्षमता है, जिससे भारत के क्लाइमेट और ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को सपोर्ट मिल रहा है.
डॉ. शाह ने NDDB के किसान-केंद्रित नजरिए पर ज़ोर दिया, जो रोजाना गोबर हैंडलिंग को क्लीन एनर्जी एक्सेस, ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र प्रोडक्शन और किसानों की बढ़ी हुई इनकम में बदलता है.
उन्होंने NDDB के डीसेंट्रलाइज़्ड घरेलू बायोगैस यूनिट से लेकर बड़े पैमाने पर बायोगैस और डेयरी कोऑपरेटिव से जुड़े CBG प्रोजेक्ट तक के स्केलेबल मॉडल को बताया. यह दिखाते हुए कि कैसे एनर्जी और मोबिलिटी सॉल्यूशन कम्युनिटी-ओन्ड सिस्टम में शामिल हो सकते हैं.
उन्होंने देश में लागू करने के लिए बनाए गए इंस्टीट्यूशनल आर्किटेक्चर पर भी जोर दिया, जिसमें NDDB MRIDA Ltd और भारतीय गोमय सहकारी समिति Ltd (एक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव) शामिल हैं, जो मिलकर टेक्नोलॉजी डिप्लॉयमेंट, खाद मैनेजमेंट, ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र मार्केटिंग और किसानों को वैल्यू दिलाने में मदद करते हैं.
उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्थान के बीच मिलकर काम करने से भारत के खाद रिसोर्स की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने और बायोगैस दशक को आकार देने में देश की लीडरशिप तय करने में मदद मिल सकती है.












