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Animal News: तीन महीने में 27 हजार पशुओं का फ्री हुआ इलाज, पशुपालकों मिल रहा फायदा

मध्य प्रदेश के एक गौशाला में चारा खाती गायें.

नई दिल्ली. बिहार में पशुपालन को सशक्त बनाने और पशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में मोबाइल वेटनरी यूनिट (एमवीयू) की पहल बेहद असरदार और फायदेमंद साबित हो रही है. प्रदेश के पशुपालक अब अपने पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक और गंभीर हो गए हैं. सरकार की सक्रियता और स्वास्थ्य सुविधाओं की आसान पहुंच का ही यह असर है कि ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालक अब पशुओं के बीमार होने पर गांव के नीम-हकीम के पास जाने के बजाय सीधे टोल फ्री नंबर डायल 1962 पर कॉल कर रहे हैं. इस नंबर पर कॉल करके वे सीधे प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों को अपने घर बुला रहे हैं, जिससे समय पर सही इलाज मिलने से पशुओं की जान बच रही है.

सिर्फ एक जिले सारण की ही बात की जाए तो 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक यानी महज बीते तीन महीनों में ही जिले में पशु चिकित्सा सेवाओं का व्यापक स्तर पर संचालन किया गया है. इस दौरान सारण जिले के सभी 20 प्रखंडों में कुल 2,600 विशेष स्वास्थ्य शिविरों का सफल आयोजन किया गया, जिनमें 2,600 गांवों को कवर किया गया है.

कहां कितने पशुओं का हुआ इलाज
इन शिविरों और मोबाइल वैन के माध्यम से जिले के करीब 15,548 पशुपालक किसानों तक सीधे स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं.

इस तीन महीने की अवधि में कुल 27,424 बीमार पशुओं का सफल और मुफ्त इलाज किया गया. इलाज किए गए पशुओं में सबसे अधिक 17,734 गाय, 5,319 भैंस, 4,280 बकरी, 10 भेड़ व अन्य 81 पशु शामिल हैं.

जिले के 20 प्रखंडों के प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कुछ प्रखंडों में पशु चिकित्सा सेवाओं विशेष प्रभाव देखने को मिला है.

इन तीन महीनों में सारण जिले के एकमा प्रखंड में सबसे अधिक 1670 और दरियापुर प्रखंड में 1667 पशुओं का इलाज किया गया.

इसके साथ ही मढ़ौरा में करीब 1541, परसा में 1424, मशरक में 1415 और गड़‌खा में 1345 बीमार पशुओं का उपचार किया गया.

इसके अलावा जिले के अन्य प्रखंडों जैसे रिविलगंज, सोनपुर, तरैया और जलालपुर सहित शेष प्रखंडों में भी पिछले तीन महीनों में 12 हजार से अधिक पशुओं का इलाज किया गया.

इस योजना का फायदा उठाने के लिए टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है.

दूर ग्रामीण इलाकों में एमवीयू के जरिए इलाज कर रही पशु चिकित्सक डॉ. सृष्टि सिंह ने बताया कि वैन के गांव पहुंचने से पशु चिकित्सकों के प्रति पशुपालकों का भरोसा बढ़ा है.

उन्होंने बताया कि पहले रजिस्ट्रेशन के लिए सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक कॉल करने की बाध्यता थी, लेकिन अब इसे हटा दिया गया है.

अब पशुपालक 24 घंटे में कभी भी 1962 पर कॉल कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं, जिसके बाद टीम उनके घर पहुंचकर पशुओं का इलाज सुनिश्चित कर रही है.

Written by
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