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Animal News: बिहार में छह चरणों में लगेगी एफएमडी की वैक्सीन, 12 जिलों में लगना शुरू हुआ फ्री टीका

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प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. पशुओं में होने वाली खुरपका-मुंहपका एफएमडी बीमारी बेहद खतरनाक बीमारी है और इससे जानवरों को बचाने के लिए बिहार सरकार की तरफ से 2 फरवरी 2026 से वैक्सीन लगाने का काम शुरू हो चुका है. राज्य और केंद्र सरकार के मिले-जुले प्रयास से डेयरी पशुओं और जिन पशुओं में ये रोग होता है, उन्हें फ्री वैक्सीन लगाई जाएगी. ताकि पशुओं को इस खतरनाक बीमारी से बचाया जा सके और इस बीमारी की वजह से पड़ रहे उत्पादन पर प्रभाव को कम किया जा सके. बताते चलें कि राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बिहार में कई चरण में वैक्सीनेशन किया जाएगा.

बिहार सरकार के डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) की ओर से अपील की गई है कि पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए राज्यव्यापी फ्री वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है. इस अभियान से जुड़कर ज्यादा से ज्यादा पशुओं को वैक्सीन लगवाएं. ताकि पशुओं को इस खतरनाक बीमारी से बचा सके.

जानें किन-किन जिलों में लग रही है वैक्सीन
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पशुओं को खुरपका—मुंहपका रोग से बचाव के लिए बिहार में 6 चरणों में वैक्सीन लगाई जाएगी.

वैक्सीनेशन पूरी तरह से फ्री होगा. इसके लिए पशुपालकों को कोई भी पैसा नहीं चुकाना होगा. राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से पशुओं को बचाने के लिए ये वैक्सीन फ्री लगाई जाती है.

बिहार सरकार की तरफ से बताया गया है कि पहले चरण के तौर पर बिहार के गोपालगंज, नालंदा, शेखपुरा, वैशाली और नवादा में वैक्सीन लगाई जाएगी.

इसके अलावा इसी चरण में सिवान, अररिया, बांका, भागलपुर, किशनगंज, मधेपुरा और पूर्णिया में भी वैक्सीनेशन कैंप लगाए जाएंगे.

जानकारी के लिए बता दें कि जिन पशुओं को पहली बार वैक्सीन लग रही है. उन्हें एक महीने के बाद बूस्टर डोज लगाया जाएगा. वहीं बिना टैग वाले पशुओं को आधार की तरह टैग भी लगाया जा रहा है.

निष्कर्ष
बता दें कि खुरपका-मुंहपका बीमारी बेहद ही गंभीर भी वायरल बीमारी है. ये गाय, भैंस, भेड़ और बकरी जैसे जानवरों को प्रभावित करती है. ये बीमारी मुंह, मसूड़े और पैरों के बीच छाले और फोड़े पैदा कर देती है. जिससे दूध उत्पादन में गिरावट दिखाई देती है. इस बीमारी के चलते तेज बुखार आता है. पशु लंगड़ा कर चलने लगते हैं. वहीं कम उम्र के पशुओं की मौत भी इस बीमारी के चलते होने लगती है.

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