नई दिल्ली. हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में सरकारी स्तर पर पहली बार भव्य स्तर का राज्यस्तरीय पशु मेले आयोजित होने जा रहा है. इसकी शुरुआत शुक्रवार से हो गई है. 3 दिन तक प्रदेशभर से बेशकीमती पशु यहां लाए जाएंगे. वहीं हजारों की संख्या में पशु प्रेमी भी यहां पहुंचेंगे और बेशकीमती पशुओं को देखेंगे. यूं तो प्रदेश में ये पशु पालन विभाग का 41वां मेला है, लेकिन पहली बार केडीबी मेला ग्राउंड में भव्य स्तर पर यह मेला होगा. जिसकी तमाम तैयारी पहले ही मुकम्मल कर ली गई है. जिम्मेदार कहीं से कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं.
इस मेले की एक खास बात है और वो खास बात यह है कि प्रदेश में मौजूद करीब 62 लाख गाय और भैंसों में से महज 1300 के करीब गाय और भैंस पहुंचेंगी. हो सकता है कि आप चौंक गए हों क्योंकि आमतौर पर हजारों की संख्या में पशु मेले में पहुंचते हैं. हालांकि यहां सिर्फ और सिर्फ कुल 1500 पशु ही लाए जाएंगे. इसके पीछे एक वजह है.
मिलिकिंग प्रतियोगिता नहीं होगी
असल में ये पहला ऐसा मेला होगा, जिसमें मिलकिंग प्रतियोगिता नहीं होगी. सिर्फ ब्रीड चैंपियनशिप होंगी. गाय भैंसों के विजेताओं में से भी छह ब्रीड चैंपियन चुने जाएंगे.
कुल 1500 में से अन्य पशु 200 के करीब होंगे. मेले में गाय, भैंस, सूअर, भेड़, बकरी, घोड़े और ऊंट लेकर पशु पालक पहुंचेंगे.
सरकारी मेले में कोई भी पशु पालक शामिल हो सकता है, लेकिन बफैलो में सिर्फ मुराह नस्ल को ही एंट्री मिलेगी.
क्योंकि पिछले कई दशकों से सरकार भी इसे ही प्रमोट कर रही है. वहीं गायों में भी देसी नस्ल शामिल होंगी.
इनमें पांच नस्ल हरियाणा, साहीवाल, थारपारकर, बेलाही और गिर को एंट्री होगी. एसडीओ डॉ. सतबीर सिंह के मुताबिक यहां सिर्फ देसी नस्लों में मुकाबला होगा.
पशु मेले में पहली बार पशुओं के बीच रैंप पर कैटवॉक होगी. इसके लिए बाकायदा मेला ग्राउंड में रैंप बनाया है.
रैंप पर विजेता पशुओं की वॉक होगी, ताकि अन्य पशुपालक और आम लोग भी उनकी खासियत जान सकें.
डॉ. सतबीर सिंह के मुताबिक कुछ समय पहले प्रदेश में पालतू पशुओं की गणना कराई गई। हालांकि अभी इसका डाटा सार्वजनिक नहीं किया है.
प्रदेश में देसी और संकर नस्ल समेत करीब 20 लाख गाएं हैं. वहीं 42 लाख के करीब भैंस, झोटे, बछड़े, बछड़ी हैं.
निष्कर्ष
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पशु मेले का आयोजन पशुओं की खरीद-बिक्री (व्यापार), उन्नत नस्लों के प्रदर्शन, पशुपालकों को वैज्ञानिक जानकारी देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत प्लेटफार्म देने के लिए किया जाता है. जिसका फायदा पशुपालकों को खूब मिलता है.









