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बकरीद की तैयारी में पशुपालक, कम पैसों में इन नस्ल का खरीदें बकरा, मिलेगा ज्यादा मीट

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बरबरी बकरी की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बकरीद में दो महीने बचे हैं. ऐसे में किसान, पशु पालक और गोट फार्म संचालकों ने बकरे तैयार करना शुरू कर दिए हैं. बकरीइ पर बकरे अच्छा मुनाफा दें, इस बात को सोचकर लोग बकरों की खिलाई-पिलाई करने में लगे हैं. वहीं कुर्बानी करने वाले भी खूबसूरत और अच्छे वजन के बकरे की तलाश में रहते हैं. यही वजह है कि मंडियों में 35-55 किलो वजन के बकरे की मांग ज्यादा होती है.वहीं कुछ लोग बकरों की नस्ल पर भी बहुत ध्यान देते हैं. कोई बरबरे बकरे को पसंद करता है तो कोई तोतापरी तो कोई सिरोही. इसी बात को ध्यान में रखते हुए बकरी फार्म संचालक बकरों को तैयार करते हैं. जब बकरा अच्छा और खूबसूरत होता है तो वो किसान, पशुपालक और बकरी फार्म संचालक को मोटा मुनाफा भी देकर जाता है. आइए जानते हैं बकरीद पर किस तरह के बकरों की डिमांड मार्केट में रहती है.

अगर चांद सही वक्त पर दिख गया तो देशभर में बकरीद 17 जून-2024 को मनाई जाएगी. इसकी तैयारियां गोट फार्म संचालकों ने पहले से ही कर दी हैं. कम समय में बकरों को अच्छी तरह से पालने पर फोकस किया जा रहा है. बकरीद पर कुछ ज्यादातर पांच-छह तरह की नस्ल के बकरों की खूब डिमांड होती है. इनमें बरबरा, सिरोही, जमुनापारी, तोतापरी, जखराना और गोहिलवाड़ी नस्ल प्रमुख होती है. ये नस्ल अपने-अपने क्षेत्र के हिसाब से पाली जाती हैं. मंडियों में 35-55 किलो वजन के बकरे की मांग ज्यादा होती है. वहीं कुछ लोग बकरों की नस्ल पर भी बहुत ध्यान देते हैं.

गोहिलवाड़ी नस्ल का बकरे
गोहिलवाड़ी नस्ल का बकरे खासतौर गुजरात के राजकोट, जूनागढ़, पोरबंद, अमरेली, और भावनगर में पाले जाते हैं. हालांकि देश इनकी तादात बेहद कम है. गोहिलवाड़ी नस्ल का बकरा 50 से 55 किलो वजन तक और बकरी 40 से 45 किलो तक की पाई जाती है. इनका रंग काला होता है, सींग मुड़े हुए और मोटे होते हैं.

जखराना बकरा यहां मिलता है
जखराना नस्ल का बकरा राजस्थान में अलवर जिले के जखराना गांव में मिलता है.इस नस्ल की बकरी की नस्ल का पालन ज्यादातर दूध और मीट दोनों के लिए पाला जाता है. इस नस्ल की बकरी ऊंची और लंबी होती हैं. जखराना बकरे का वजन 50 से 55 किलो तक हो जाता है. बकरी 45 किलो वजन तक की होती है. देश में जखराना की संख्याा करीब नौ लाख है.

बरबरे बकरे की सबसे ज्यादा डिमांड
बरबरे नस्ल की बकरा-बकरी उत्तर प्रदेश के मथुरा, आगरा, एटा, इटावा जिले में मिलती है. इस नस्ल के बकरों की डिमांड सबसे ज्यादा बकरीद पर रहती है. इन बकरों की नस्ल का वजन 35-40 किलो वजन तक हो जाता है. अरब देशों में बरबरे बकरे की खूब डिमांड रहती है. मीट खाने के शौकीन भी बरबरे बकरे का मीट बहुत पसंद करते हैं. बकरीद के दौरान लाइव बरबरे बकरे भी सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत के साथ ही ईरान-इराक में सप्लाई किए जाते हैं.

तोतापरी बकरे में ये हैं खूबियां
तोतापरी नस्ल की बकरी राजस्थान में पाई जाती है. इस बकरियों को दूध और मांस दोनों के लिए पाला जाता है. तोतापरी बकरी अन्य बकरियों की अपेक्षा काफी लंबी और मजबूत होती है, जो छोटे-मोटे पेड़ों तक पर चढ़ जाती है. एक बकरे का वजन करीब 40 से 70 किलो के बीच में होता है, वही एक बकरी 35 से 55 किलो के बीच में होती है. तोतापुरी नस्ल की बकरी 12 से 15 महीने की उम्र में बच्चा पैदा करना शुरू कर देती हैं. औसत स्तनपान अवधि 175 दिन है. तोतापुरी खुद को किसी भी वातावरण और जलवायु के साथ आसानी से अपना सकती है.

य​हां से खरीद सकते हैं सिरोही बकरी
सिरोही बकरे की नस्ल राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश राज्यों में पाई जाती है. इस नस्ल की बकरियां आकार में मध्यम होती हैं. इनके शरीर का रंग लाल और काले-सफेद धब्बे होते हैं. सींग घुमावदार होते हैं. सिरोही मादा बकरी की लंबाई 62 सेमी और नर बकरी की लंबाई 80 सेमी होती है.

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