नई दिल्ली. यदि किसान खेती-किसानी के साथ-साथ पशुपालन भी करने लगें तो उनकी इनकम दोगुनी हो सकती है. इसी वजह से किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास करती रही है. वहीं ऐसे किसान जिनके पास खेती के लिए जमीन कम है वो भी पशुपालन करके अच्छा पैसा कमा सकते हैं. सरकार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए कई योजनाएं भी चला रही है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग अशोकनगर द्वारा दयोदय कोलुआ गोशाला परिसर में मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति सहरिया को अनुदान पर मुर्रा भैसे वितरित कीं. यह भैंसे जिले के 10 लोगों को दी गई.
इन ईसागढ़ चिकित्सा’ विस्तार अधिकारी राजेंद्र बाथम ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को मुर्रा भैंसे प्रदान की गई हैं. इसमें ईसागढ़ ब्लॉक में 6 लोगों को भैंसे दी गईं. अशोकनगर ब्लॉक में 2 लोगों की और चंदेरी ब्लॉक में 2 लोगों को मुर्रा प्रजाति के भैंसे प्रदान की गई हैं.
इस शर्त पर मिलेगी दूसरी भैंस
हितग्राहियों को दो दो भैंसे देना थीं लेकिन अभी एक-एक भैंस दी गई. दो महीने बाद इन लोगों को दूसरी भैंस दी जाएगी.
पहले पशुपालन एवं डेयरी विभाग की टीम दो महीने तक दो बार इनके घर जाकर देखेगी कि यह लोग भैसों की खान पान देखभाल किस प्रकार कर रहे हैं.
तीन माह तक पशु आहार दिया जाएगा. इसके बाद इनको दूसरी भैंस दी जाएगी. विशेष पिछड़ी जनजाति के हितग्राहियों से अंशदान के रूप में 10 प्रतिशत राशि जमा करवाई गई है.
इसमें एक दुधारू भैंस की कीमत एक लाख दस हजार रुपए है. दो भैंसों के लिए हितग्राहियों से 25 हजार रुपए जमा कराए गए हैं.
जिसमें भैंसों का तीन साल के लिए बीमा किया गया तो वही दो माह के दाना दिया जाएगा.
मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत जो दुधारू भैंसे विशेष पिछड़ा जनजाति सहरिया हितग्राहियों को दी गई है.
इससे इन लोगों की दूध बेचने से आय बढ़ेगी वही पिछड़ी जनजाति के इन लोगों के बच्चे भी दूध पियेंगे तो कुपोषण भी दूर होगा.
वही 90 प्रतिशत अनुदान राशि के साथ भैंसों का वितरण किया गया. मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय कार्यक्रम में जिला पंचायत कृषि स्थाई समिति की सभापति शीतल सत्येंद्र कलावत, सांसद प्रतिनिधि हरिओम नायक मौजूद रहे.
इसके अलावा संजीव भारील, विधायक प्रतिनिधि शिवप्रताप रघुवंशी, भाजपा किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष बबलू यादव, उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के डॉ. मनीष व्यास, योजना नोडल अधिकारी डॉ. संजय सिंह कौरव, पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी ईसागढ़ डॉ. राजेंद्र बाथम आदि भैंस वितरण के दौरान वहां थे.











