नई दिल्ली. डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में पशु जितना ज्यादा दूध का उत्पादन करता है उतना ही मुनाफा होता है. हालांकि पशु दूध का उत्पादन तभी कर पाता है, जब उसे भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से भरपूर खुराक मिलती है. अगर पशु की खुराक में कोई कमी आती है तो सबसे पहला असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. वहीं लगातार खुराक में कमी के चलते पशु की सेहत भी खराब हो सकती है और उसका दूध उत्पादन हमेशा के लिए खराब हो सकता है. इतना ही नहीं पशु बीमार पड़ने पर गंभीर अवस्था में जा सकता है और इससे उसकी मृत्यु भी हो सकती है. इसलिए पशु की खुराक पर ध्यान देना जरूरी होता है.
अक्सर पशुपालक भाई ये सवाल करते हैं कि पशु को कितना खिलाए जाना चाहिए और उसको खिलाने का सही तरीका क्या है. ताकि पशु की तमाम जरूरत भी पूरी हो जाए और इससे वह दूध उत्पादन भी बेहतर तरीके से करे. यदि आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो इस रिपोर्ट को पूरा पढ़ें ताकि किसी तरह की दुविधा खत्म हो जाए.
कैसे और कितना पशुओं को खिलाएं
बहुत से पशुपालक भाई ऐसा करते हैं कि दिनभर नांद के अंदर चारा डाल देते हैं जिससे पशु दिनभर खाता रहता है. जबकि ये तरीका सही नहीं है.
क्योंकि पशु को जुगाली करने का भी समय मिलना चाहिए. जिससे वह जो कुछ खा पी रहा है, वह अच्छे से पच जाएगा और उत्पादन बेहतर होगा.
ऐसे में एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पशु को दो वक्त चारा खाने के लिए देना चाहिए लेकिन जिन पशुओं का प्रोडक्शन ज्यादा अच्छा है उन्हें तीन बार या फिर चार बार भी दिया जा सकता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जाता है कि जानवर को चारा खाने के बाद पचाने का वक्त भी मिलना चाहिए.
आमतौर पर एक दुधारू पशु को 10 से 12 किलो हरा चारा खिलाया जाता है. तीन-चार किलो उसमें भूसा मिलाया जाता है और 2 से 3 किलो दाना भी दिया जाता है.
पशु के सामने जब यह चारा रखा जाता है तो उसमें दाना और हरा चारा वो खा लेता है. सिर्फ भूसा छोड़ता है. नांद के अंदर दिए गए चारे का 10 प्रतिशत बचना चाहिए.
कम बच रहा है तो इसका मतलब यह है कि जानवर का वजन कम है उसे और देना चाहिए और अगर ज्यादा बच रहा है तो इसका मतलब यह है कि पशुपालक ज्यादा चारा डाल रहा है.
निष्कर्ष
अगर 20 किलो ड्राई मैटर खिलाया जा रहा है तो 2 किलो ड्राई मैटर बचना चाहिए. अगर इतना बच रहा है तो पशु स्वस्थ है और उसका उत्पादन भी बेहतर होगा.











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