Home पशुपालन Animal Husbandry: दिसंबर में पशुओं का इस तरह रखें ख्याल, लुवास के एक्सपर्ट ने बताया क्या करना चाहिए
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Animal Husbandry: दिसंबर में पशुओं का इस तरह रखें ख्याल, लुवास के एक्सपर्ट ने बताया क्या करना चाहिए

सीता नगर के पास 515 एकड़ जमीन में यह बड़ी गौशाला बनाई जा रही है. यहां बीस हजार गायों को रखने की व्यवस्था होगी. निराश्रित गोवंश की समस्या सभी जिलों में है इसको दूर करने के प्रयास किया जा रहे हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पशुपालन में पशुओं की देखरेख मौसम के लिहाज से की जाती है. जैसा मौसम है, उसी तरह से पशुओं को देखभाल की जरूरत होती है. अगर पशुपालक पशुओं की देखरेख मौसम के हिसाब से करते हैं तो इसका सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि पशु के उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता है. क्योंकि एक बार पशु के उत्पादन पर असर पड़ जाए तो इसका मतलब है कि डेयरी व्यवसाय में नुकसान होने लग जाएगा. इसलिए जरूरी है कि किसी भी हालत में पशु पालन में दूध उत्पादन में कमी न हो पाए. वहीं पशुओं की देखरेख करने के कई और भी फायदे हैं.

एनिमल एक्सपर्ट कहते हैं कि पशुओं की देखभाल में उन्हें संतुलित चारा देना भी शामिल होता है. वहीं उनके रहने की जगह का भी चयन इसमें शामिल है. मसलन, मौसम के लिहाज से पशुओं के बाड़े में कुछ बदलाव किये जाते हैं.

ठंड से बचाने के लिए ये काम करें
इस वक्त ठंड का महीना है तो ऐसे में पशुओं के बाड़े को पूरी तरह से ढक देना चाहिए. खिड़की और दरवाजे पर बोरे लगाने चाहिए. जिससे बर्फीली हवाएं अंदर न जा सकें. इससे पशुओं को राहत मिलेगी. ज्यादा ठंड पड़ने पर पशुओं को बोरे पहनाये भी जाते हैं. इससे उन्हें ठंड से बचाया जाता है. लुवाह हिसार के एक्सपर्ट की ओर से दिसंबर के महीने में पशुपालन से जुड़े कुछ कार्यों को करने के संबंध में गाइलाइन जारी की गई है. ताकि पशुपालक इसे करें और अपने पशुओं को ठंड में होने वाली परेशानियों से बचा सकें. एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं को सर्दियों से बचाना बेहद ही जरूरी होता है.

दिसंबर में क्या करना चाहिए, जानें यहां

  1. एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए उनका बिछावन सूखा रखना चाहिए. वहीं समय-समय पर बिछावन को बदलते रहना चाहिए.
  2. बिछावन के लिए सूखे बारीक घास, सरसों या बाजरे की तूड़ी आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  3. लुवास एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओ को ताजा एवं स्वच्छ पानी पिलाएं. इससे उन्हें बीमारी लगने का खतरा कम हो जाता है.
  4. बछड़ी और बछड़ों में पेशाब रुकने पर जल्द से जल्द पशु चिकित्सक से संपर्क करें. नहीं तो मामला गंभीर हो सकता है.
  5. पशुपालकों को चाहिए कि पशुओं को हल्का व्यायाम करवाएं. इससे पशुओं को आराम मिलता है. उन्हें गर्मी का अहसास भी होता है.
  6. पशुओं का रोजाना खुरेरा करना चाहिए. इससे उनके खुर से जुड़ी समस्या कम हो जाती हैं.
  7. दुधारू पशुओं को 50-100 ग्राम, व्यस्क बछड़े और बछिया को शुष्क पशु को 50 ग्राम व बछड़े व बछिया को 25-50 ग्राम प्रतिदिन खनिज मिश्रण दें.
  8. पशुओं को रोजाना साधारण नमक 25 -50 ग्राम प्रति पशु रोजाना देना चाहिए.
Written by
Livestock Animal News Team

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