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Dairy: डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए आंध्र प्रदेश की रिसर्च टीम ने एनडीडीबी चेयरमैन से की मुलाकात

रिसर्च टीम के साथ एनडीडीबी चेयरमैन.

नई दिल्ली. रायथु साधिकारा संस्था (RySS) (आंध्र प्रदेश कम्युनिटी मैनेज्ड नेचुरल फार्मिंग), आंध्र प्रदेश और वैगनिंगेन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च का एक प्रतिनिधिमंडल आनंद में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह से मुलाकात की. इस दौरे का मकसद भारत के डेयरी इकोसिस्टम को समझना और यह पता लगाना था कि इससे मिली सीख प्राकृतिक खेती प्रणालियों को कैसे मदद और मजबूती दे सकती है. प्रतिनिधिमंडल ने NDDB की गतिविधियों और सहयोग के मौकों में गहरी दिलचस्पी दिखाई।. चेयरमैन ने उनका स्वागत किया और आपसी हित के क्षेत्रों का पता लगाने के लिए खुली चर्चा को बढ़ावा दिया.

चर्चा के दौरान, डॉ. शाह ने भारत के डेयरी क्षेत्र का एक छोटा सा विवरण दिया और NDDB के मुख्य प्रयासों पर प्रकाश डाला. उन्होंने 75 हजार नई सहकारी समितियों के जरिए सहकारिता का विस्तार करने, डेयरी क्षेत्र में संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने, और साथ ही पशु प्रजनन, पशु स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के बारे में बात की.

किसानों को बेहतर बाजार तक दिलाती है पहुंच
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL)—जो NDDB द्वारा बढ़ावा दी गई एक बहु-राज्यीय सहकारी संस्था है.

किसानों को बेहतर बाजारों तक पहुंचने और अपनी जैविक उपज के लिए ज्यादा कीमतें पाने में मदद कर रही है.

स्थिरता पर जोर देते हुए, उन्होंने एथनोवेटेरिनरी दवा, मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिए राशन संतुलन, और बायोगैस जैसी पहलों पर प्रकाश डाला.

उन्होंने गोबर-आधारित और संपीड़ित बायोगैस परियोजनाओं जैसे खाद प्रबंधन के प्रयासों के बारे में भी बात की.

ये परियोजनाएँ खेत पर ऊर्जा की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ जैविक खाद भी बनाती हैं, जिससे आय के अतिरिक्त स्रोत बनते हैं. और चक्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है.

डॉ. शाह ने NDDB MRIDA Ltd—जो NDDB और Suzuki R&D Center India (SRDI) का एक संयुक्त उद्यम है—की भी सराहना की, जो डेयरी कचरे को स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद में बदलने की दिशा में लगातार काम कर रहा है.

प्रतिनिधिमंडल ने RySS द्वारा चलाए जा रहे आंध्र प्रदेश कम्युनिटी-मैनेज्ड नेचुरल फार्मिंग (APCNF) कार्यक्रम के बारे में जानकारी साझा की. यह कार्यक्रम रसायन-मुक्त और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देता है.

उन्होंने कृषि-पारिस्थितिकी के क्षेत्र में किसान-केंद्रित अनुसंधान और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने में Indo-German Global Academy for Agro-ecology Research and Learning की भूमिका पर भी प्रकाश डाला.

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