नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में पशुपालन को सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित रखने की बजाय इसे प्रोफेशनल मॉडल में बदलने की तैयारी शुरू हो गई है. राज्य सरकार डेनमार्क और ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर ब्रीडर फेडरेशन और ब्रीडर एसोसिएशन बनाने जा रही है, ताकि पशुपालक अपनी नस्ल, बाजार और आय तीनों पर खुद नियंत्रण कर सकें. योजना के अनुसार राज्य स्तर पर एक मुख्य फेडरेशन बनेगा, जबकि जिला स्तर पर साहिवाल, गिर, थारपारकर और मुर्रा जैसी नस्लों के पशुपालकों की अलग-अलग एसोसिएशन बनाई जाएंगी.
पहले जिलों में चुनाव होंगे, फिर प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा. शुरुआत में प्रशासनिक अधिकारी सचिव के रूप में कामकाज संभालेंगे, लेकिन 3 से 5 साल बाद इन संस्थाओं को पूरी तरह स्वायत्त कर दिया जाएगा. सरकार इन संस्थाओं को शुरुआती दौर में कार्यालय, फंड और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद देगी.
राज्य में 500 पशुपालक हुए चिन्हित
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेशभर में सर्वे लगभग पूरा हो चुका है और तय मानक के करीब 500 पशुपालक चिन्हित किए जा चुके हैं.
अगले एक महीने में योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी है. फेडरेशन में वही पशुपालक शामिल हो सकेंगे, जिनके पास किसी एक नस्ल के कम से कम 25 पशु हों.
उदाहरण के लिए, साहिवाल नस्ल के संरक्षण के लिए सदस्य बनने वाले किसान के पास 25 साहिवाल गायें होना जरूरी होगा.
यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि नस्ल की जेनेटिक शुद्धता बनी रहे और क्रॉस ब्रीडिंग से हो रहे नुकसान को रोका जा सके.
सिर्फ दूध बेचने तक सीमित नहीं रहेगी कमाई
इस मॉडल के लागू होने के बाद पशुपालकों की कमाई सिर्फ दूध बेचने तक सीमित नहीं रहेगी.
फेडरेशन के पास पशुओं के सर्टिफिकेशन का अधिकार होगा, जिससे प्रमाणित पशुओं की बाजार कीमत बढ़ेगी.
चारा, दवाइयां और उपकरण थोक में खरीदकर सदस्यों को सस्ते में दिए जा सकेंगे.
डॉ. अजय रामटेके, उप संचालक, पशुपालन विभाग ने बताया कि पशुपालक अपने उत्पादों की सीधी मार्केटिंग कर पाएंगे, जिससे बिचौलियों का कमीशन घटेगा.
पायलट के तौर पर मालवा और निमाड़ के के जिलों में अगले छह महीनों में पंजीकरण और पहली बैठकें शुरू होने की संभावना है.
मप्र में पहली बार ब्रीडर फेडरेशन बनाने की तैयारी है. सर्वे लगभग पूरा हो चुका है और अगले एक महीने में इसे स्वरूप देना शुरू कर देंगे.
शुरुआत में सरकारी मदद मिलेगी, बाद में यह स्वायत्त संस्था बनेगी. इसका मकसद एक ही नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देना है.











Leave a comment