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GADVASU: पशु का लंगड़ापन डेयरी फार्मिंग में बनता है नुकसान का कारण

वर्कशॉप में मौजूद भारत और डेनमार्क के एक्सपर्ट.

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (GADVASU), लुधियाना ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से, खुर प्रबंधन पर एक विशेष अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया इस वर्कशॉप का उद्देश्य डेयरी पशुओं में खुरों की देखभाल और लंगड़ापन (lameness) के प्रबंधन के क्षेत्र में संकाय सदस्यों, पशु चिकित्सकों, क्षेत्रीय अधिकारियों और पशुधन पेशेवरों के व्यावहारिक कौशल और वैज्ञानिक समझ को बढ़ाना था. वर्कशॉप में प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें कुलपति डॉ. जे.पी.एस. गिल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.

इस कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सकों, ‘बानी’ (Baani) के प्रतिनिधियों और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. कार्यशाला का एक मुख्य आकर्षण डेनमार्क के विशेषज्ञ मेहमानों द्वारा दिया गया सत्र था. इनमें डेनिश खाद्य और पशु चिकित्सा प्रशासन तथा मत्स्य पालन एजेंसी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की मुख्य सलाहकार डॉ. कैमिला ब्राश एंडरसन, कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा नैदानिक ​​विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निन कैपियन; और खुर विशेषज्ञ (Hoof Trimmer) एनेट वेस्टरगार्ड शामिल थीं.

नई तकनीक के बारे में बताया
उन्होंने खुरों की कटाई (trimming) की उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन किया, जिसमें ‘व्हाइट लाइन पद्धति’ पर विशेष जोर दिया गया.

यह मवेशियों में खुरों की चोटों के प्रभावी निदान और उपचार के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त एक दृष्टिकोण है.

इन प्रत्यक्ष प्रदर्शनों और व्यावहारिक प्रशिक्षणों ने प्रतिभागियों को खुरों के स्वास्थ्य प्रबंधन की आधुनिक पद्धतियों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान की.

डॉ. गिल ने पशुओं के कल्याण, उत्पादकता और डेयरी पशुओं की दीर्घायु को बेहतर बनाने में खुरों की वैज्ञानिक देखभाल के महत्व पर जोर दिया.

उन्होंने संस्थान द्वारा की गई इस पहल की सराहना की, जिसके माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञता का लाभ क्षेत्रीय पशु चिकित्सकों और किसानों तक पहुंचाया गया.

पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के डीन डॉ. एसएस रंधावा ने इस बात पर रोशनी डाली कि लंगड़ापन एक प्रमुख समस्या है.

जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता, और यह डेयरी व्यवसाय के मुनाफे को प्रभावित करती है.

उन्होंने कहा कि इस तरह के क्षमता-निर्माण कार्यक्रम अनुसंधान और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा मवेशियों में लंगड़ापन की समस्या के क्षेत्र में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों का भी जिक्र कियाा.

क्लिनिक के निदेशक डॉ. जे. मोहिंद्रू ने गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, और पशुधन स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों तथा साक्ष्य-आधारित पद्धतियों से पशु चिकित्सकों को अद्यतन (update) रखने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया.

इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में NDDB का सहयोग और तकनीकी इनपुट अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुए.

एक संवादात्मक सत्र में, प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की.

साथ ही डेयरी पशुओं के झुंड में खुरों के स्वास्थ्य प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श किया.

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