नई दिल्ली. इस बात में कोई शक नहीं है कि डेयरी फार्मिंग के काम में कमाई अच्छी की जा सकती है. छोटे स्तर से इस काम को शुरू करके बड़े लेवल तक पहुंचा जा सकता है. डेयरी फार्मिंग में न सिर्फ दूध बल्कि इससे बनने वाले तमाम उत्पादों को बेचकर और ज्यादा अच्छी इनकम होती है. कम लागत में डेयरी फार्मिंग करके अब आत्मनिर्भर बन चुकी मध्य प्रदेश के धार जिले की महिला ने ये साबित कर दिया है कि इस काम में आगे जाने का बहुत रास्ता है.
धार जिले के मलनगांव की रहने वाली सुनीता धांगड़ ने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है. कभी आर्थिक परेशानियों से जूझने वाली सुनीता आज सफल डेयरी व्यवसायी बन चुकी हैं. गांव में लोग अब उन्हें लखपति दीदी के नाम से पहचानते हैं.
घी, मक्खन और पनीर बनाकर भी करती हैं कमाई
सुनीता ग्रामीण परिवार से हैं. 9 सदस्यों का परिवार खेती और कुछ हद तक पशुपालन पर निर्भर था. कम आमदनी में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा था.
कई बार घर के खर्च को पूरा करना भी चुनौती बन जाता था. सुनीता की जिंदगी में बदलाव आया जब वो बाबा रामदेव स्व सहायता समूह से जुड़ीं.
समूह से उन्हें 50 हजार की आर्थिक मदद मिली. इस पैसे से उन्होंने एक भैंस खरीदी और दूध बेचने का काम शुरू किया. यहीं से उनकी सफलता की शुरुआत हुई.
समूह के सहयोग और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की मदद से सुनीता को 2 लाख रुपए का लोन मिला. इस राशि से उन्होंने तीन अच्छी नस्ल की भैंसे खरीदी.
धीरे-धीरे उनका डेयरी व्यवसाय बढ़ने लगा. अब से स्थानीय बाजार के साथ डेयरी कंपनियों को भी दूध सप्लाई कर रही हैं.
सुनीता ने घी, मक्खन और पनीर बनाकर बिक्री शुरू की. इससे उनकी आमदनी और और ज्यादा बढ़ गई. सरकारी सहायता से पशुओं के लिए शेड भी बनवाया है.
सुनीता हर महीने 40 हजार से 45 हजार तक की आय अर्जित कर रही हैं. वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि दूध एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसकी डिमांड दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है. लोग अच्छी क्वालिटी का दूध खरीदना पसंद करते हैं. यदि इस काम को किया जाए तो इससे अच्छी कमाई की जा सकती है.










