नई दिल्ली. डेयरी सेक्टर में बहुत संभावनाएं हैं. सरकार की भी इस बात को समझ चुकी है. जिस वजह से ज्यादा से ज्यादा किसानों को पशुपालन की ओर आकर्षित करने का काम किया जा रहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि डेयरी सेक्टर में ज्यादा फायदा कमाने के लिए साइंटिफिक डेयरी फार्मिंग की जरूरत है. इसके बिना पशुओं से ज्यादा उत्पादन नहीं लिया जा सकता है. जब ज्यादा उत्पादन मिलेगा, तभी डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में फायदा होगा. इसी कड़ी में गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना की तरफ से साइंटिफिक, स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम में किसानों को अहम जानकारी दी गई.
यूनिवर्सिटी में दो हफ्ते का डेयरी फार्मिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया. जिसमें 41 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया. डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, वाइस-चांसलर ने ट्रेनिंग की तारीफ की और साइंटिफ़िक, स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग के जरिए पशु किसानों को एजुकेट करने के लिए यूनिवर्सिटी की कमिटमेंट को दोहराया.
वैल्यू एडिशन पर जोर दिया
एजुकेशन के इंस्ट्रक्शनल डिसेमिनेशन में, डॉ. आरएस ग्रेवाल ने न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी, रोजगार और ग्रामीण आर्थिक विकास में डेयरी की भूमिका पर जोर दिया.
कोर्स डायरेक्टर, डॉ. जसविंदर सिंह ने हाउसिंग, डाइट, लेवी स्वेलिंग, बायोलॉजिकल सिक्योरिटी और मार्केटिंग पर आधारित करिकुलम की रूपरेखा बताई.
प्रोग्राम को डॉ. रवदीप सिंह, डॉ. प्रतीक सिंह धालीवाल और स्टूडेंट कोऑर्डिनेटर डॉ. सिमरनपाल सिंह सेखों ने कोऑर्डिनेट किया. दो हफ्ते का डेयरी फार्मिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम 41 पार्टिसिपेंट्स के साथ ऑर्गनाइज किया गया.
डॉ. जेपीएस वाइस चांसलर ने नतीजे-ओरिएंटेड प्रोग्राम की तारीफ की ओर साइंटिफिक, स्किल-बेस्ड इंटरवेंशन के जरिए पशुधन किसानों को मजबूत बनाने के लिए यूनिवर्सिटी की कमिटमेंट को दोहराया.
डायरेक्टर एक्सटेंशन एजुकेशन, डॉ. आरएस ग्रेवाल ने न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी, रोजगार और ग्रामीण आर्थिक विकास में डेयरी की भूमिका पर जोर दिया, जिसमें वैल्यू एडिशन पर जोर दिया गया.
कोर्स डायरेक्टर, डॉ. जसविंदर सिंह ने प्रैक्टिस-ओरिएंटेड करिकुलम की रूपरेखा बताई जिसमें हाउसिंग, न्यूट्रिशन, मैस्टाइटिस कंट्रोल, बायोसिक्योरिटी और मार्केटिंग शामिल हैं.
इस प्रोग्राम को डॉ. रवदीप सिंह, डॉ. प्रतीक सिंह धालीवाल और स्टूडेंट कोऑर्डिनेटर डॉ. सिमरनपाल सिंह सेखों ने कोऑर्डिनेट किया.









