नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने उज्जैन में आयोजित एक कार्यक्रम में एनडीडीबी द्वारा संचालित ‘सांची डेयरी’ की नई ब्रांड पहचान और नए डिजाइन वाली पैकेजिंग ‘स्वाद, सेहत, सांची’ को लॉन्च किया. उन्होंने उज्जैन मिल्क यूनियन के रीब्रांडेड वाहनों के बेड़े को भी हरी झंडी दिखाई, जिसमें एक नई आइसक्रीम कार्ट भी शामिल थी. कार्यक्रम के दौरान, NDDB के चेयरमैन ने भारत की शानदार डेयरी यात्रा और मध्य प्रदेश में डेयरी सहकारी समितियों को नई गति देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला.
एनडीडीबी चेयरमैन ने कहा कि भारत, जो कभी दूध की कमी वाला देश था, आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है. देश की बड़ी लैक्टो-वेजिटेरियन आबादी के लिए, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में दूध और डेयरी उत्पादों की अहम भूमिका है. प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता बढ़ाने में ‘ऑपरेशन फ्लड’ और सहकारी आंदोलन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
सहकारी नेटवर्क को फैलाया जा रहा है
‘श्वेत क्रांति 2.0’ के तहत, NDDB मुख्य कार्यान्वयन एजेंसी के तौर पर देश भर में डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार और उन्हें मजबूत करने के लिए काम कर रहा है.
मध्य प्रदेश में, NDDB ने MPCDF और सभी छह मिल्क यूनियनों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया है.
साथ ही उनके कामकाज को मजबूत करने तथा सहकारी नेटवर्क को और अधिक गांवों तक फैलाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. ‘सांची’ मध्य प्रदेश में एक मजबूत और भरोसेमंद ब्रांड है.
अपनी नई पहचान ‘स्वाद, सेहत, सांची’ के साथ, ब्रांड का लक्ष्य उपभोक्ताओं के साथ अपने जुड़ाव को गहरा करना और साथ ही राज्य के डेयरी प्रोसेसिंग सेक्टर के विस्तार और आधुनिकीकरण में सहयोग करना है.
2,973 करोड़ की डेयरी विकास योजना को हाल ही में कैबिनेट से मिली मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शुक्रिया अदा किया.
NDDB के चेयरमैन ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य की मिल्क यूनियनों की प्रोसेसिंग क्षमता को मजबूत करना एक मुख्य प्राथमिकता है.
अगले पांच सालों में, इस योजना का लक्ष्य दूध इकट्ठा करने की क्षमता को बढ़ाकर लगभग 52 लाख लीटर प्रतिदिन करना है.
साथ ही, इसमें गांव के स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, दूध और दूध से बने उत्पादों की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग करना, और पशुओं से मिलने वाले दूध की उत्पादकता को बढ़ाना भी शामिल है.
‘सांची’ ब्रांड की नई पहचान में दूध की अलग-अलग कैटेगरी, दही, पनीर, छाछ और दूसरे डेयरी उत्पादों के लिए एक जैसा और आधुनिक पैकेजिंग डिज़ाइन लाया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश की खास गोंड कला की झलक मिलती है.
इन कोशिशों के केंद्र में किसान हैं. बेहतर आमदनी, पक्के बाजार और मजबूत कोऑपरेटिव सिस्टम के ज़रिए मध्य प्रदेश के डेयरी सेक्टर को नई गति देने का साझा संकल्प ही इन प्रयासों का आधार है.











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