नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास विकास बोर्ड ज्याद से ज्यादा गांवों को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने के लिए इस साल काम करने जा रहा है. इसे जानकर हो सकता है आपके दिमाग में ये सवाल उठ रहा हो कि इसका क्या फायदा है, तो बता दें कि ऐसा होने से छोटे डेयरी फार्मर्स को सीधे बाजार, सही दाम और तकनीकी सहायता मिलती है. जिसका सीधे तौर पर फायदा छोटे डेयरी फार्मर्स को मिलेगा. वहीं इससे रोजगार, महिला सशक्तिकरण और दूध की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ पशु स्वास्थ में भी सुधार होता है.
गौरतलब है कि 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर, एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी शाह ने कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं और डेयरी से परे व्यापक राष्ट्र-निर्माण प्रयासों में एनडीडीबी की बढ़ती भूमिका पर रोशनी डाली. एनडीडीबी के चेयरमैन ने डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत करने, दूध की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करने और अधिक गांवों को सहकारी नेटवर्क में लाने के लिए कई राज्यों के साथ एनडीडीबी के बढ़ते सहयोग के बारे में बात की.
बुनियादी ढांचे का होगा विकास
वहीं डॉ. शाह ने भारतीय डेयरी सहकारी मॉडल की ताकत को रेखांकित किया जो किसानों को ज्यादा दाम ट्रांसफर को सुनिश्चित करता है.
साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर इस मॉडल को प्रदर्शित करने के एनडीडीबी के प्रयासों का भी जिक्र किया.
उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास, तकनीकी परामर्श, वैक्सीन पहल और डेयरी बुनियादी ढांचे के विस्तार पर एनडीडीबी के फोकस पर भी प्रकाश डाला.
आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए, उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक के रूप में भारत की स्थिति पर भी बात की.
साथ ही इसके लिए. प्रजनन, पोषण और पशु स्वास्थ्य में प्रमुख तकनीकी मदद के बारे में बात की.
उन्होंने किसानों के लिए अतिरिक्त आय पैदा करने के लिए जिम्मेदार संसाधन उपयोग, मीथेन कटौती पहल, बायोगैस विकास और सहयोग पर जोर दिया.
अपने समापन भाषण में, डॉ. शाह ने एनडीडीबी कर्मचारियों को उनके समर्पण के लिए धन्यवाद दिया और किसानों, स्थिरता और दीर्घकालिक विकास के लिए एनडीडीबी की प्रतिबद्धता की पुष्टि की.
एनडीडीबी के सलाहकार को मिला पद्म श्री
वहीं दूसरी ओर भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक, पद्म श्री से सम्मानित होने पर एथनो-वेटरनरी मेडिसिन (ईवीएम) में अग्रणी और एनडीडीबी के एक मूल्यवान सलाहकार डॉ. पुन्नियामूर्ति नटेसन को बधाई दी गई.
ये सम्मान उनके परिवर्तनकारी योगदान, टिकाऊ और एंटीबायोटिक-मुक्त पशुधन स्वास्थ्य प्रथाओं की उनकी वकालत और पशु स्वास्थ्य देखभाल और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए उनकी आजीवन प्रतिबद्धता का जश्न मनाता है.










