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Dairy: बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर के उत्पादन में अहम है डेयरी कोऑपरेटिव नेटवर्क

विचार व्यक्त करते एनडीडीबी चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह.

नई दिल्ली. यूके के बर्मिंघम में आयोजित ‘वर्ल्ड बायोगैस एक्सपो एंड समिट 2026’ में ‘ग्लोबल बायोगैस आउटलुक इंडिया, इटली, यूक्रेन’ सेशन के दौरान, NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने भारत के डेयरी-आधारित सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को पेश किया. उन्होंने बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर के उत्पादन को बढ़ाने में देश के डेयरी कोऑपरेटिव नेटवर्क की भारी क्षमता पर जोर दिया. इससे किसानों के लिए इनकम के नए अवसर पैदा होंगे, साथ ही एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी और ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन में योगदान मिलेगा.

इस प्रेजेंटेशन में दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश के तौर पर भारत की खास खूबियों को दिखाया गया, जहां 8 करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण डेयरी परिवार और 30.2 करोड़ मवेशी हैं, और सालाना लगभग 165.3 करोड़ टन गोबर पैदा होता है. 22 राज्य फेडरेशन, 241 जिला मिल्क यूनियन, 2.3 लाख से ज़्यादा गांव की डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियों और 1.7 करोड़ डेयरी किसानों के कोऑपरेटिव नेटवर्क के साथ, यह सेक्टर सस्टेनेबल बायोगैस पहलों को बढ़ाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है.

डेयरी कोऑपरेटिव मार्केट तक पहुंच पपर दिया जोर
डॉ. शाह ने इस बात पर जोर दिया कि डेयरी कोऑपरेटिव मार्केट तक पहुंच, मुनाफे का सही बंटवारा और ग्रामीण इलाकों का सस्टेनेबल विकास सुनिश्चित करते हैं.

उन्होंने NDDB के बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले खाद प्रबंधन मॉडलों के बारे में भी डिटेल से जानकारी दी.

इनमें घरेलू बायोगैस प्लांट शामिल हैं जो खाना पकाने के लिए साफ़ ईंधन, ऑर्गेनिक स्लरी और कार्बन क्रेडिट का फायदा देते हैं.

साथ ही सेंट्रलाइज़्ड बायोगैस और CBG प्लांट भी हैं जो साफ़ ऊर्जा और ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र बनाते हैं और गोबर खरीदकर किसानों को अतिरिक्त आय देते हैं.

गांव के स्तर पर साफ़ ऊर्जा और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कम्युनिटी बायोगैस सिस्टम को भी एक असरदार समाधान के तौर पर बताया गया.

डॉ. शाह ने भारत-जापान CBG पहल पर भी रोशनी डाली, जिसका मकसद देश के कोऑपरेटिव इकोसिस्टम के ज़रिए 1,000 CBG और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्लांट लगाना है.

उन्होंने NDDB MRIDA लिमिटेड के ज़रिए सुज़ुकी मोटर कॉर्पोरेशन, सस्टेन प्लस एनर्जी फ़ाउंडेशन और मल्टी-स्टेट मैन्योर कोऑपरेटिव के साथ NDDB की रणनीतिक साझेदारियों के बारे में भी बताया.

ताकि पूरे भारत में बायोगैस के इस्तेमाल को बढ़ाया जा सके और खाद की वैल्यू चेन को मजबूत किया जा सके.

अपने भाषण के आखिर में, डॉ. शाह ने फिर से कहा कि खाद एक कीमती संसाधन है, कचरा नहीं, और ग्लोबल साझेदारियों के जरिए सर्कुलर बायो-इकोनॉमी को आगे बढ़ाने के लिए NDDB की प्रतिबद्धता को दोहराया.

उन्होंने कहा कि भारतीय डेयरी कोऑपरेटिव मॉडल रिन्यूएबल एनर्जी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, किसानों की खुशहाली और समावेशी ग्रामीण विकास के लिए एक ऐसा रास्ता देता है जिसे बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है.

Written by
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