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Milk Production: डेयरी से गांवों में रोजगार पैदा करेगी सरकार, नई तकनीक पर हो रहा काम

The revised NPDD will give an impetus to the dairy sector by creating infrastructure for milk procurement
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में गौपालन की समृद्ध परम्परा को आगे बढ़ाते हुए अब डॉ. मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश को देश की दूध क्रांति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. दूध व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पेड़ है. यह पशुपालकों के आर्थिक स्वावलंबन का माध्यम है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों और पशुपालकों को समृद्धि के द्वार खुल रहे हैं. डेयरी सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए कार्ययोजना के तहत सरकार आगे बढ़ रही है. इस सेक्टर में गांवों में ही रोजगार की नई सम्भावनाएं मौजूद हैं. उत्पादन से जुड़े किसानों और पशुपालकों को दूध उत्पाद से फायदा ज्यादा हो रहा है.

पशुधन के स्वास्थ्य और उपचार स्थानस्तर पर सुविधा मुहैया कराने के लिए आमदनी बढ़ाने को सरकार अब मिशन मोड पर काम कर रही है. आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में पशुपालकों और दूध उत्पादकों को भारी रझान भी दिखाई दे रहा है. ग्वालियर में पशुओं केयर एंड वेलनेस सेंटर खोलने, ग्वालियर के पशु स्वास्थ्य एवं उपकर केन्द्र का उन्नयन करने तथा नया पा चिकित्सालय खोलने के साथ ही कई काम शुरू हो चुका है.

डेयरी उद्यमियों का बढ़ा मुनाफा
डेयरी उद्यमिता को एक फायदेमंद, टिकाऊ और तकनीक से जुड़े ‘रोजगार सृजन मॉडल’ के रूप में स्थापित करने के लिए हर स्तर पर काम जारी है.

नतीजे में प्रदेश में प्रतिदिन दूध कलेक्शन बढ़कर 12 लाख लीटर हो गया है. सरकार इस दूध कलेक्शन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है.

नस्ल सुधार, गौशालाओं को हाइटेक बनाने और स्वावलंबी बनाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं.

दो साले पहले तक प्रदेश में करीब 1800 गौशालाएं थीं. सहायता राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रति गौवंश करने के बाद 1300 नई गौशालाओं का निर्माण हुआ है.

राज्य दूध उत्पादन के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है, सरकार का लक्ष्य प्रदेश को पहले स्थान तक पहुंचाना है.

इस दिशा में शुरू किए गए प्रयास अब सफल होते दिखाई दे रहे है. प्रदेश में अब तक 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है.

इसके साथ ही दुग्ध क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को करने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए है. सरकार द्वारा ग्वालियर डेयरी प्लांट के आधुनिकीकरण का कार्य किया जा रहा है.

शिवपुरी डेयरी प्लांट को फिर सक्रिय कर नया जीवन दिया गया है. वहीं, इंदौर में प्रतिदिन 3 लाख लीटर क्षमता वाले मिल्क पाउडर की शुरुआत की गई है.

सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से प्रदेश को दूध उत्पादन और विपणन के क्षेत्र में नई पहचान मिल सही है और मध्य प्रदेश तेजी से देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है.

Written by
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