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Scheme: आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के जरिए शुरू करें पशुपालन

सीता नगर के पास 515 एकड़ जमीन में यह बड़ी गौशाला बनाई जा रही है. यहां बीस हजार गायों को रखने की व्यवस्था होगी. निराश्रित गोवंश की समस्या सभी जिलों में है इसको दूर करने के प्रयास किया जा रहे हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.


नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार हर हाल में राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाना चाहती है. यही वजह है कि कई ऐसे काम किए जा रहे हैं, जिससे दूध उत्पादन बढ़े. कई योजनाएं भी शुरू की गईं हैं. सरकार की तरफ से दूध उत्पादन में वृद्धि करने के लिए सभी वर्ग के लोगों के लिए आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना शुरू की गई है. सरकार का कहना है कि इससे न सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ेगा बल्कि इसका दूध सबसे बड़ा फायदा ये भी है कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

आपको बता दें कि इस योजना के तहत सरकार डेयरी फॉर्मिंग के लिए लोन लेने पर ब्याज का कुछ हिस्सा अपनी ओर से अदा करती है. इसलिए आप इस योजना का फायदा लेकर डेयरी फार्मिंग का काम शुरू करके मुनाफा कमा सकते हैं.

एक एकड़ जमीन होना चाहिए
बता दें कि फायदा लेने वाले के पास 5 पशुओं के लिए न्यूनतम 1 एकड़ कृषि भूमि होना आवश्यक है.

वहीं पशुओं की संख्या में वृद्धि होने से आनुपातिक रूप से वृद्धि करते हुए न्यूनतम कृषि भूमि का निर्धारण किया जाएगा.

इस योजना को सभी वर्ग के सीमांत और छोटे किसानों को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया है.

योजना इकाई लागत कितनी है
पशुपालक न्यूनतम 5 या इससे अधिक पशु की योजना स्वीकृत करा सकेगा तथा परियोजना की अधिकतम सीमा राशि 10 लाख रुपए तक होगी.

परियोजना लागत का 75 प्रतिशत राशि बैंक ऋण के माध्यम से प्राप्त करनी होगी तथा शेष राशि की व्यवस्था मार्जिन मनी सहायता एवं हितग्राही का स्वयं के अंशदान के रूप में करनी होगी.

इकाई लागत के 75 प्रतिशत पर या हितग्राही द्वारा बैंक से प्राप्त ऋण पर जो भी कम हो 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से (अधिकतम रू. 25,000 प्रतिवर्ष) ब्याज की प्रतिपूर्ति 7 वर्षों तक विभाग द्वारा की जाएगी.

5 प्रतिशत से अधिक शेष ब्याज दर पर ब्याज की प्रतिपूर्ति हितग्राही को खुद से करना होगी.

मार्जिन मनी सहायता
सामान्य वर्ग के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत्, अधिकतम 1.50 लाख रुपए निर्धारित की गई है.

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति हेतु परियोजना लागत का 33 प्रतिशत्, अधिकतम 2 लाख लाख रुपए है.

डेयरी किसानों का ग्राम सभा में अनुमोदन होना चाहिए. ग्राम सभा से अनुमोदित हितग्राहियों का जनपद पंचायत की सभा में अनुमोदन भी जरूरी है.

जनपद पंचायत के अनुमोदन उपरांत जिले के उप संचालक पशुपालन विभाग अनुमोदित प्रकरण को स्वीकृति हेतु बैंक को प्रेषित कर स्वीकृति प्राप्त करेंगे.

संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी/पशु औषधालय के प्रभारी / उपसंचालक पशु चिकित्सा से संपर्क कर सकते हैं.

Written by
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