नई दिल्ली. डेयरी व्यवसाय के लिए पाली गई गाय जब बच्चे को जन्म देती है तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान देना बेहद अहम होता है. जिसका तार गाय के दूध प्रोडक्शन से भी जुड़ा होता है. अगर इन बातों पर ध्यान न दिया जाए तो हो सकता है कि प्रोडक्शन पर असर पड़े. इसके चलते डेयरी व्यसाय में नुकसान उठाना पड़ सकता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो बछड़े आमतौर पर बिना किसी की मदद के ही पैदा हो जाते हैं. हालांकि कई बार उनके जन्म के वक्त कुछ दिक्कतें जरूर आती हैं. ऐसे में वेटनरी डॉक्टर का वहां पर होना जरूरी होता है, ताकि समस्या का तुरंत समाधान हो सके.
बच्चे के पैदा होने के समय जो भी असामान्यता हो, अगर वहां पशु चिकित्सक मौजूद है तो समस्या होने का चांस बहुत कम हो जाता है. वहीं इस दौरान साफ-सफाई का बेहद ही ख्याल रखना चाहिए. ताकि पशु और उसके बछड़े को किसी भी तरह की गंदी के कारण होने वाले इंफेक्शन से बचाया जा सके.
ये काम जरूर कर लें
बछड़े को निकालने के बाद, पशु को दूध पिलाना बेहद अहम काम है. इससे प्लेसेंटा को निकालने में मदद मिलती है. प्लेसेंटा आमतौर पर ब्याने के 2 से 6 घंटे के भीतर बाहर निकल जाता है. एक्सपपर्ट कहते हैं कि अगर 12 घंटे के भीतर प्लेसेंटा बाहर नहीं निकलता है तो इसे रिटेन प्लेसेंटा माना जाता है. रिटेन प्लेसेंटा के मामले में इसे हटाने के लिए पशु चिकित्सक को बुलाया जाना बेहद अहम होता है. वहीं सामान्य जन्म के बाद, मादा सतर्क होती है और ब्याने के एक या दो घंटे के भीतर खाने-पीने के लिए तैयार हो जाती है. ब्याने के बाद मादा को गर्म पानी और थोड़ा गेहूं का चोकर दिया जाना चाहिए. ब्याने के बाद डेयरी पशुओं को उठने और चरनी में जाने के लिए प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है. खासकर ब्याने के दिन और ब्याने के बाद के पहले 2 दिनों में.
हर दिन करनी चाहिए निगरानी
एक्सपर्ट का मानना है कि ब्याने के बाद पशु की स्वास्थ्य समस्याओं पर बारीकी से नजर रखी जानी चाहिए. फीड सेवन और दूध उत्पादन को देखने के अलावा, मलाशय (Rectum) के तापमान और कीटोन के स्तर की प्रतिदिन निगरानी की जानी चाहिए. हैल्थ समस्याओं वाले पशुओं की पहचान की जानी चाहिए और उनके अनुसार उनका इलाज किया जाना चाहिए. जबकि हैल्दी पशु प्रसव के 3 से 4 दिन बाद सामान्य आबादी में शामिल हो सकते हैं. बताते चलें कि अक्सर पशुओं में मवेशियों में सिस्टिक डिम्बग्रंथि की समस्या रहती है. यह समस्या आम तौर पर ब्याने के बाद पहले दो महीनों में होती है. सिस्टिक डिम्बग्रंथि बीमाारी से गायों में अंडोत्सर्ग (Ovulation) और चक्र सामान्य रूप से नहीं होता. इससे दूध प्रोडक्शन भी कम हो जाता है.
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