नई दिल्ली. ठंड का मौसम शुरू होने वाला है. खासतौर से उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ती है. जबकि इन इलाकों में कोहरा भी बहुत घना पड़ता है. जबकि कई शहरों में तो दिन के 12 बजे तक भी कोहरा पड़ता ही रहता है. जिससे तापमान नीचे चला जाता है. जब ऐसी परिस्थिति आती है तो इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी ठंड से बचने के हर उपाय करते हैं. या फिर जो लोग पशु को पालते हैं या फिर पोल्ट्री फॉर्म चलाते हैं उन्हें भी अपने पशु पक्षियों को बचाने के लिए इंतजाम करना ही पड़ता है. जब ज्यादा ठंड पड़ने लगती है तो मुर्गियों को जितने तापमान की जरूरत होती है उसमें उनका ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत होती है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट कहते हैं कि मुर्गियां बहुत ही सेंसेटिव नेचर की होती हैं. आमतौर पर होता ये है कि अगर मुर्गियां किसी भी तरह के मौसम में खुद को असहज महसूस करने लगती हैं तो फिर अंडे का उत्पादन कम होने लगता है. ऐसे में पोल्ट्री फार्म चलाने वालों को अंडे का उत्पादन बनाए रखने के लिए सर्दी-गर्मी हर तरह के मौसम में मुर्गियों की जरूरत के हिसाब से तापमान देने की जरूरत होती है. जबकि ये भी खतरा रहता है कि अगर पोल्ट्री फार्म में तापमान मेंटेन नहीं किया गया तो कई बार मुर्गियों की मौत का कारण भी बना जाता है.
जानकारों की मानें तो ये जरूरी नहीं हैं कि मुर्गी साल के 365 दिन अंडा देती ही रहे. अंडा देने वाली लेयर बर्ड (मुर्गी) एक साल में 280 से 290 तक ही अंडे देती है. विशेषज्ञ कहते हैं कि बचे हुए 85 से 75 दिन अंडा न देने के पीछे कई वजहें हैं. वहीं रोजमर्रा की कुछ ऐसी भी बातें हैं जिनसे मुर्गी अजीब फील करती है. क्योंकि मुर्गी बहुत ही सेंसेटिव बर्ड होती है अगर इसकी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ भी बदलाव होता है तो इसका सीधा असर अंडों के उत्पादन पर पड़ता है और मुर्गी अंडा देना बंद कर देती है. यदि ऐसा हो गया तो ये मुर्गी पर निर्भर करेगा कि वो दो दिन, चार-छह या फिर 10 दिन बाद अंडा दे.
कितने तापमान की होती है जरूरत
मुगियों को कितने तापमान की जरूरत पड़ती है, इस संबंध में पोल्ट्री एक्सपर्ट पंकज सिंह कहते हैं कि अंडे देने वाली लेयर मुर्गियां हो या फिर ब्रॉयलर चिकन सभी के लिए 25 से 26 डिग्री तापमान मेंटेन करना पड़ता है. यदि तापमान इससे कम या ज्यादा हुआ तो मुर्गियां परेशानी होने लगती है. यही वजह है कि पोल्ट्री फार्म में तापमान बताने वाले उपकरण भी लगाए जाते हैं. जैसे अब सर्दी के मौसम में तापमान एवरेज चार से पांच डिग्री तक तो जाता ही है. ऐसे में मुर्गियां ठंड की चपेट में न आएं और उन्हें गर्मी मिलती रहे इसके लिए ब्रूडर लगाना होता है.
यह हीटर की तरह से काम करते हैं. बता दें कि ब्रूडर गैस और बिजली दोनों से ही काम करते हैं. ब्रूडर का इस्तेमाल खासतौर पर अंडे देने वाली लेयर मुर्गी के फार्म में किया जाता है. जबकि ब्रॉयलर चिकन के बड़े-बड़े फार्म में भी ब्रूडर का इस्तेंमाल होता है. जबकि कुछ जगहों पर जहां संख्या कम होती है वहां लकड़ी का बुरादा और कोयले जलाकर भी ब्रॉयलर चिकन को गर्माहट देने की व्यवस्था की जाती है.











