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Fish Farming: मछली पालकों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाई गई, छत्तीसगढ़ में हुए कई विकास कार्य

Deep Sea fishing vessels, Ice Plants, Livelihood & Nutritional Support have been implemented in Kakinada District.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य पालन और जलीय कृषि के सतत विकास के लिए 2020-21 से 2026-27 (सितंबर, 2026) तक 20 हजार 750 करोड़ रुपये के कुल खर्च के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को लागू किया है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने अवसंरचना, उत्पादन, जलीय कृषि विस्तार, प्रौद्योगिकी के समावेश, कल्याणकारी गतिविधियों के लिए समर्थन, बाजार विस्तार और कल्याणकारी हस्तक्षेपों के माध्यम से मछुआरों और मछली पालकों की वित्तीय, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाकर छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

भारत सरकार के मत्स्य विभाग ने पिछले छह वर्षों (2020-21 से 2025-26) के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार को पीएमएमएसवाई के तहत 956.86 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 321.01 करोड़ रुपये था.

5.52 लाख मछुआरों को मिली ये सुविधा
स्वीकृत केंद्रीय हिस्से में से पिछले छह वर्षों (2020-21 से 2025-26) में छत्तीसगढ़ सरकार को 274.16 करोड़ रुपये जारी किए गए.

मछुआरों की वित्तीय, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से पीएमएमएसवाई के तहत राज्य को स्वीकृत प्रमुख परियोजनाओं में 28 मछली बीज हैचरी, 3200 हेक्टेयर नए मछली तालाब, 287 पुनर्संचारी मत्स्य पालन प्रणाली, 820 बायोफ्लॉक इकाइयां और 14 अन्य परियोजनाएं शामिल हैं.

छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए विभिन्न क्षमताओं वाली 511 मछली चारा मिलें लगाई गईं हैं.

इसके अलावा 511 छोटे मछली परिवहन वाहन, जलाशयों में 8500 केज्स और एक एकीकृत मत्स्य पार्क (आईएपी) स्थापित किए गए हैं.

इसके अलावा 5.52 लाख मछुआरों को वार्षिक दुर्घटना बीमा कवरेज, 9667 मछुआरों को वार्षिक आजीविका और पोषण सहायता की गई है.

किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 4189 मछुआरों को संस्थागत ऋण तक बेहतर पहुंच जैसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी की गई हैं.

इन सभी प्रयासों से मछली उत्पादन में वृद्धि हुई है. मछली उत्पादन 2014-15 में 3.14 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 8.73 लाख मीट्रिक टन हो गया है.

इससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है, उद्यमिता को बढ़ावा मिला है, ग्रामीण रोजगार पैदा हुए हैं.

फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आई है और छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान मिला है.

इस बात की जानकारी खुद मत्स्यपालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी है.

Written by
Livestock Animal News Team

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