नई दिल्ली. ठंड के दौरान भारतीय मेजर कार्प जैसे कत्ला, रोहू आदि का विकास यानी ग्रोथ रुक जाती है. जबकि कुछ प्रजातियां ऐसी हैं जो अच्छी तरह से ठंड को सह पाती हैं और कम तापमान में भी अच्छी ग्रोथ हासिल करती हैं. इससे बेहतर उत्पादन मिलता है और मछली पालक को फायदा भी. भारत के मत्स्य पालन विभाग (Department of Fisheries, Government of India) के एक्सपर्ट का कहना है कि मछली पालकों को ठंड में ऐसी मछलियां पालना चाहिए, जो ठंड को सहन कर पाती हों और अच्छी ग्रोथ करती हों. इससे उन्हें फायदा ज्यादा मिलेगा.
एक्सपर्ट के मुताबिक सिल्वर कार्प मछली उन्हीं में से एक है, जो पानी को छानकर फीड लेने वाली मछली है और फाइटो प्लैक्टन सूक्ष्म पौधे को खाकर विकास कर जाती है. जबकि ठंड में ये आसानी से जीवित भी रहती हैं और ग्रोथ भी करती हैं.
सिल्वर कार्प मछली की क्या है खासियत
सर्दियों में चाहे जितनी भी ठंड पड़े, सिल्वर कार्प ठंड को सहने की क्षमता रखती है. बता दें कि जब आप एक से ज्यादा मछलियों को पालते हैं तो ये पानी की ऊपरी सतह पर रहती है.
वहीं ठंड के मौसम में तालाब में फाइटो प्लैक्टन की अधिकता को नियंत्रित करके पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने में बेहद ही सहायक होती है.
इसकी ग्रोथ भले ही धीमी होती हो लेकिन अन्य कार्प मछलियों की तुलना में ज्यादा क्रियाशील रहती है और लगातार अपना भार बढ़ाती रहती है.
एक्सपर्ट सिल्वर कार्प के बारे में कहते हैं कि ये 6 डिग्री से लेकर 28 डिग्री के बीच में रह सकती है. हालांकि 10 डिग्री से नीचे तापमान आने पर इन्हें थोड़ी परेशानी होती है.
ठंड में इन्हें भी ज्यादा भोजन देने की जरूरत नहीं पड़ती. हल्के पचने वाले भोजन जैसे, गेहूं आदि दिया जा सकता है. खासकर तब जब तापमान 10 से 15 डिग्री के बीच हो.
निष्कर्ष
इस मछली की खासियत ये भी है कि ऑक्सीजन की कमी वाले पानी में भी जीवित रह सकती है और यही बात इन्हें ठंड के लिए बेहद ही उपयोगी मछली बनती है. इससे मछली पालक को अच्छा उत्पादन मिलता है और फिश फार्मिंग के काम में मुनाफा बढ़ जाता है.










