नई दिल्ली. जुलाई का महीना शुरू हो गया है. ऐसे में मछली पालकों को मछली पालन के काम में अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है. इसके लिए ब्रुडर तालाब में पूरक आहार का प्रयोग मछली के कुल शरीर भार का 2 से 3 प्रतिशत की दर से करें. बेहतर प्रजनक मछली तैयार करने के लिए प्रति किलो ग्राम पूरक आहार में 10 ग्राम मिनरल मिक्चर एवं 5 ग्राम गट प्रोबायोटिक्स का प्रयोग करें. मत्स्य बीज उत्पादक अपने हैचरी से रोहू, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प एवं सिल्वर कार्प का स्पॉन उत्पादन गहन प्रबंधन से करना चालू रखें.
नर्सरी तालाब में स्पॉन डालने के 15-20 दिनों के बाद ही रासायनिक उर्वरक का प्रयोग करें. नर्सरी तालाब की तैयारी के बाद स्पॉन का संचयन 15-20 लाख प्रति एकड़ की दर से करें. रियरिंग तालाब की तैयारी के बाद फ्राई से फिगरलींग बनाने हेतू फ्राई का संचयन 1.5 से 2 लाख प्रति एकड़ की दर से करें.
गोबर का भी छिड़काव करें
फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि तालाब में चूने का प्रयोग 15 दिनों के अन्तराल पर पी०एच० मान के अनुसार 10-15 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से करें.
माह में एक बार जैविक खाद के रूप में मवेशी का गोबर 400 किलो ग्राम प्रति एकड़ या सरसों या राई की खल्ली 100 किलो ग्राम प्रति एकड़ डालें.
वहीं सिंगल सुपर फॉस्फेट डीएपी 15-20 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से घोल कर छिड़काव करें.
रासायनिक एवं जैविक उर्वरक के तालाब में छिड़काव के बीच का अन्तराल कम से कम 15 दिन का होना चाहिए.
पानी ज्यादा हरा होने पर चूना एवं रासायनिक उर्वरक का प्रयोग बन्द कर दें.
जुलाई माह में बरसात का मौसम एवं आर्द्रता अधिक होने के कारण तालाब के पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम हो जाने की संभावना बनी रहती है.
इस समस्या से बचने के लिए शाम को तालाब के पानी को पंप सेट की मदद से तालाब में ही फैलाकर गिराएं.
या फिर घुलनशील ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दवा का प्रयोग 400-500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 15 दिनो के अन्तराल पर सुखा छिड़काव करें या सुबह-शाम 4-4 घन्टा तालाब में ऐयरेटर चलाएं.
तालाब का पानी ज्यादा हरा होने पर 20 किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से फिटकिरी /500-800 ग्रा0 कॉपर सल्फेट का घोल कर छिडकाव करें.
मौसम खराब रहने पर तालाब में पूरक आहार का प्रयोग नहीं करें.
तालाब में मछलियों को संक्रमण से बचाव हेतु प्रति माह 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से पोटॉशियम परमैगनेट या अन्य 500 ml वाटर सैनिटाइजर का प्रयोग घोल कर करें.
निष्कर्ष
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग बिहार के एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसा करना मछलियों की सेहत के लिए अच्छा होगा. जुलाई माह में मत्स्य-पालकों इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.










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