नई दिल्ली. भारत सरकार ने लघु मत्स्य पालन, मत्स्य सहकारी समितियों और एफएफपीओ को मजबूत करने के लिए सरकार ने कइमहत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. सरकार की तरफ से ईईजेड नियम समुद्री इकोसिस्टम की हिफाजत और मछली पकड़ने के समान अवसरों को सुनिश्चित करने के लिए एलईडी लाइट फिशिंग, पेयर ट्रॉलिंग और बुल ट्रॉलिंग जैसी हानिकारक मछली पकड़ने की प्रथाओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हैं. बायोडायवर्सिटी विविधता के संरक्षण के लिए, मछली प्रजातियों के लिए एक न्यूनतम कानूनी आकार भी निर्धारित किया जाएगा और घटते मछली स्टोरेज को बहाल करने के लिए राज्य सरकारों सहित हितधारकों के परामर्श से मत्स्य प्रबंधन योजनाएं विकसित की जाएंगी.
बताया गया कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन बढ़ाते हुए मछली पकड़ने के दबाव को कम करने के लिए समुद्री पिंजरे की खेती और समुद्री शैवाल की खेती जैसी समुद्री कृषि प्रथाओं को भी वैकल्पिक आजीविका के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा. ये उपाय विशेष रूप से छोटे पैमाने के मछुआरों और उनकी सहकारी समितियों को फायदा पहुंचाएंगे. जिससे उन्हें गहरे समुद्र के संसाधनों तक पहुंचने, अधिक आय अर्जित करने और टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को वैश्विक बाजारों में निर्यात करने में सहायता मिलेगी.
ईईजेड संचालन के लिए डिजिटल और पारदर्शी एक्सेस पास व्यवस्था
ईईजेड नियमों के अंतर्गत, मशीनीकृत और बड़े आकार के मोटर चालित जहाजों के लिए एक्सेस पास आवश्यक है, जिसे ऑनलाइन रीएएलसीराफ्ट पोर्टल के माध्यम से निःशुल्क प्राप्त किया जा सकता है.
मोटर चालित या गैर-मोटर चालित मछली पकड़ने वाले जहाजों का संचालन करने वाले पारंपरिक और छोटे पैमाने के मछुआरों को एक्सेस पास प्राप्त करने से छूट दी गई है.
यह प्रणाली पूरी तरह से डिजिटल और समयबद्ध है, जिससे नाव मालिक न्यूनतम दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकते हैं.
वास्तविक समय में आवेदनों की निगरानी कर सकते हैं और किसी भी कार्यालय में जाए बिना आसानी से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. इससे पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी होती है और समय की बचत होती है.
छोटे पैमाने के मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए, किसी भी व्यवस्था के अंतर्गत, मछली पकड़ने वाले विदेशी जहाजों को भारत के ईईजेड में संचालन के लिए एक्सेस पास प्राप्त करने की अनुमति नहीं है.
रीएएलसीराफ्ट को मछली पकड़ने और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी करने के लिए समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) और निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) के साथ भी एकीकृत किया जा रहा है, जो प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में समुद्री भोजन के निर्यात के लिए प्रमुख आवश्यकताएं हैं.
यह एकीकृत डिजिटल प्रणाली संपूर्ण निगरानी, स्वच्छता अनुपालन और इको-लेबलिंग सुनिश्चित करती है, जिससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ती है.










