Home मछली पालन Fish Farming: मछली उत्पादन में 104 परसेंट का इजाफा, जानें कितना बढ़ गया उत्पादन
मछली पालन

Fish Farming: मछली उत्पादन में 104 परसेंट का इजाफा, जानें कितना बढ़ गया उत्पादन

अगर आप छोटे गड्ढे में मछली पालन का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको तालाब के आकार को चुनना होगा. एक से 2000 स्क्वायर फीट के तालाब में आप बढ़िया मछली पालन कर सकते हैं.
तालाब में मछली.

नई दिल्ली. फिशरीज सेक्टर में प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हजारों रुपए इंवेस्ट किए गए हैं. इसका असर भी अब दिखना शुरू हो गया है. एक आंकड़े के मुताबिक भारत के वार्षिक मछली उत्पादन में 104 फीसद की महत्वपूर्ण ग्रोथ दर्ज की गई है और ये वित्तीय वर्ष 2013-14 में 95.79 लाख टन से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 195 लाख टन हो गई है. आइलैंड मछली पालन और मछली पालन प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरे हैं, जो कुल उत्पादन का 75 फीसद से अधिक है.

वहीं आइलैंड मछली पालन अकेले ही 2024-25 में 147.37 लाख टन तक पहुंचकर 140 फीसद की की वृद्धि दर्ज की, जो देश के आंतरिक संसाधनों के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है. आंतरिक मछली पकड़ना और एक्वाकल्चर ताजे और खारे जलाशयों जैसे नदियों, झीलों, तालाबों और बांधों में मछलियों को पकड़ने और फसल उगाने से संबंधित हैं. जबकि आंतरिक मछली पकड़ने में ताजे और खारे जल में स्वाभाविक रूप से उपलब्ध प्रजातियों से मछलियां निकाली जाती हैं, एक्वाकल्चर मछली की खेती के नियंत्रित तरीकों का उपयोग करता है, जैसे तालाब और पिंजरा संस्कृति, साथ ही पुनरावृत्ति एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और बायोफ्लोक जैसी तकनीकें.

किसानों को मिल रहा है फायदा
आंतरिक मछली पालन पालन और जलकृषि वर्ष भर उत्पादन, इनपुट और आउटपुट पर अधिक नियंत्रण, और छोटे पैमाने के किसानों के लिए बेहतर उपयुक्तता प्रदान करते हैं. वे अनुपयोगी या असंगठित तालाबों और खारे प्रभावित भूमि को उत्पादक उपयोग में लाने का विशेष लाभ भी देते हैं, प्रभावी रूप से ‘बर्बाद भूमि’ को ‘धन भूमि’ में बदलते हुए, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आय और आजीविका उत्पन्न करते हैं. इससे किसानों को फायदा होता है. उनके पास आजीविका का एक और जरिया बन जाता है. जिससे उनकी इनकम बढ़ जाती है.

कई यूनिटों को दी गई मंजूरी
इतना ही नहीं 8 आईसीएआर मत्स्य अनुसंधान संस्थानों, 4 मत्स्य उप कार्यालयों और मत्स्य विश्वविद्यालयों के समर्थन से, टेक्नोलॉजी आंतरिक मत्स्य पालन और जलकृषि की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हो गई है. पीएमएमएसवाई और नीली क्रांति के तहत, आंतरिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 45,000 इकाइयां, जैसे कि आरएएस, पिंजरे, बायोफ्लोक सिस्टम और रेसवे, को मंजूरी दी गई है, जिससे उत्पादन में 20 गुना तक वृद्धि हो रही है. आईसीएआर-सीआईएफआरआई के साथ एक पायलट भी लॉन्च किया गया है ताकि मछली परिवहन, निगरानी और स्थायी प्रबंधन के लिए ड्रोन तकनीक का पता लगाया जा सके.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

Under Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) and Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund (FIDF) the Department of Fisheries has approved the development of post-harvest interface viz- cold storage, fish processing and Marketing infrastructure.
मछली पालन

Fish Farming: बिहार में मछलियों की ब्रांडिंग करने की है तैयारी, मछली किसानों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली. बिहार मछली उत्पादन के मामले में आगे बढ़ रहा है....

मछली पालनसरकारी स्की‍म

Fish Farming Scheme: बिना टेंशन करिए मछली पालन, नुकसान होगा तो सरकार करेगी मदद

नई दिल्ली. बाढ़, चक्रवात, जल प्रदूषण और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण...

Deep Sea fishing vessels, Ice Plants, Livelihood & Nutritional Support have been implemented in Kakinada District.
मछली पालन

Fish Farming: अगले 5 वर्षों में तीन करोड़ टन मछली उत्पादन का लक्ष्य

नई दिल्ली. भारत ने अंतर्देशीय लघु मत्स्य पालन के लिए एक अलग...

मछली पालन

Fish Farming: जयंती रोहू और अमृत कतला मछली पालकर कम वक्त में ज्यादा कमाई का मिलता है मौका

नई दिल्ली. मछली पालन एक बेहतरीन काम है और इसको करके अच्छी...