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Fisheries: बिहार में 20 हजार एक्वाकल्चर यूनिट की मदद करेगी सरकार, महिलाओं को प्राथमिकता

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. राज्य सरकार का ‘बिहार एक्वाकल्चर सुधार कार्यक्रम’ (BAIP) दिसंबर 2025 से शुरू होकर, तीन साल और नौ महीने की अवधि में लगभग 20,000 एक्वाकल्चर इकाइयों के विकास में सहायता करने की योजना बना रहा है. बिहार डेयरी, मत्स्य पालन और पशु संसाधन विभाग के सचिव कपिल शिरसत अशोक ने बताया कि यह कार्यक्रम मछली पालन में कम उत्पादकता, बिखरी हुई उत्पादन प्रणालियों, बाजार से कम जुड़ाव और आधुनिक एक्वाकल्चर तरीकों को कम अपनाने जैसी समस्याओं का समाधान करता है. इस कार्यक्रम में इन कृषि-जलवायु क्षेत्रों में नर्सरी तालाब, ग्रो-आउट तालाब और ब्रीडर फार्म शामिल होंगे.

इसमें स्थानीय पारिस्थितिक स्थितियों के अनुसार विशेष उपाय किए जाएंगे, ताकि एक्वाकल्चर का विकास समावेशी, विस्तार योग्य और टिकाऊ हो सके. कपिल अशोक ने बताया कि BAIP को लागू करने की रणनीति में कृषि-जलवायु और जिला-विशेष दृष्टिकोण अपनाया गया है, ताकि हर जगह की परिस्थितियों के अनुसार सही एक्वाकल्चर विकास सुनिश्चित किया जा सके.

इन नौ जिलों को दी जाएगी प्राथमिकता
उन्होंने आगे कहा कि BAIP को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, उन्होंने कहा कि पहले चरण (Phase-I) में नौ प्राथमिकता वाले जिले शामिल हैं.

पूर्वी चंपारण, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पूर्णिया, भागलपुर और बांका.

ये जिले उत्तरी बिहार, मिथिलांचल और पूर्वी बिहार क्षेत्रों में फैली विविध एक्वाकल्चर उत्पादन प्रणालियों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

दूसरा चरण (Phase-II), जो दिसंबर 2027 में शुरू होगा, इस कार्यक्रम का विस्तार पश्चिमी चंपारण, नालंदा, सीवान, सारण, कैमूर और रोहतास तक करेगा. इस तरह, राज्य के अन्य प्रमुख एक्वाकल्चर क्षेत्रों तक भी इसकी पहुँच बढ़ जाएगी.

उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से लागू करने से कार्यक्रम का विस्तार सोच-समझकर किया जा सकता है, इससे सीखने और उपायों में ज़रूरत के हिसाब से सुधार करने का मौका मिलता है.

परियोजना के तय दायरे से आगे बढ़कर, BAIP की कार्यान्वयन टीम ज़रूरत के अनुसार तकनीकी और ज्ञान-संबंधी सहायता प्रदान करेगी, ताकि सरकार की बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सके.

BAIP का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इसके 10 लाख (1 मिलियन) लक्षित लाभार्थियों में से लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं हों.

उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनकी अनौपचारिक भूमिकाओं से नेतृत्व और उद्यमिता की ओर आगे बढ़ने में सक्षम बनाने के लिए, BAIP कुछ विशेष रणनीतियाँ अपना रहा है.

इनमें ‘ग्रो-आउट फ़ार्म’ (मछली पालन फ़ार्म) से जुड़ी गतिविधियों के लिए 60 प्रतिशत महिला ‘मास्टर ट्रेनर’ सुनिश्चित करना; ‘मछली किसान उत्पादक संगठनों’ (FFPOs) में 60 प्रतिशत महिला शेयरधारकों को संगठित करना और FFPO के बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना शामिल है.

Written by
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