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Fish Farming : जानिए मछली पालन के तालाब में कैसे करें खाद का यूज, इन खास बातों का रखें ध्यान

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन एक बेहद ही फायदेमंद कारोबार है. बहुत से किसान मछली पालकर अपनी इनकम को दोगुना कर रहे हैं. जबकि सरकार भी मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों की मदद करती है. भारत में जितनी मछली की डिमांड है, उतनी मांग पूरी नहीं हो पाती है. इसकी वजह यह है भी है कि कि भारत में मछली पालन की सटीक जानकारी बहुत से किसानों के पास नहीं है. मछली पालन के दौरान कई खास बातों का ध्यान रखना होता है.

जिस तरह से पशुपालन के दौरान पशुओं के चारा-पानी का ख्याल रखना होता है. इस तरह से मछली के चारों का ख्याल और उनको होने वाली बीमारियों के साथ-साथ जिस जगह पर मछली पाली जाती है, मसलन तालाब का खास ख्याल रखना पड़ता है. तालाब में खाद का प्रयोग भी किया जाता है. आईए जानते हैं कि तालाब में खाद का प्रयोग कैसे करें.

बढ़ाया जाता है प्राकृतिक भोजन का उत्पादन: तालाब में मछली की प्राकृतिक भोजन का उत्पादन जैविक कार्बनिक एवं रासायनिक अकार्बनिक खाद का उपयोग करके बढ़ाया जा सकता है. जिसमें सही मात्रा में समय-समय पर फास्फोरस नाइट्रोजन और पोटाश खाद डाला जाता है. तालाब में खाद डालने के बाद पोषक तत्व जल में घोलकर मिल जाते हैं और कुछ तालाब की तली की मिट्टी द्वारा बांध लिए जाते हैं और धीरे-धीरे पानी और सूरज की प्रक्रिया से मछली को पोषक तत्वों के रूप में पानी में उपलब्ध होते रहते हैं. इन उपलब्ध पोषक तत्वों और सूरज की किरणों से प्रक्रिया से वनस्पति को एवं जंतु फलवालकों की उत्पत्ति होती है. जो मछलियों के लिए प्राकृतिक खाद्य पदार्थ का काम करते हैं और मछलियां इससे तेजी से बढ़ती हैं

चूना डालने की एक्सपर्ट देते हैं सलाह: तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं. जैविक और रासायनिक खाद दोनों ही तरह का संभावित उपयोग फायदेमंद होता है. पहले प्रतिमाह जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए. उसके 15 दिन के बाद रासायनिक खाद डालना चाहिए. मत्स्य संचयन के 15 दिन के पहले शुरू में मात्र 5000 किलोग्राम ताजा गोबर प्रति हेक्टेयर की तरह से डालना चाहिए. दूसरे महीने से प्रतिमा 555 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की तरह से डाला जाता है.

काई पैदा हो जाए तो न डालें खाद: इसके अलावा तालाब में यूरिया 18 किलोग्राम या कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट 36 किलोग्राम, सिंगल सुपर फास्फेट 30 किलोग्राम और प्रति हेक्टेयर की दर से प्रतिमाह डाला जाता है. सतह पर हरी काई पैदा हो जाए तो खाद नहीं डालना चाहिए. जब महुआ, खली का उपयोग किया जाए तो प्रारंभिक मात्रा गोबर खाद डालनी चाहिए. गोबर खाद को तालाब के किनारे ढेर बनाकर डाला जाता है. ताकि खाद पानी में घुलती रहे.

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