नई दिल्ली. बिहार के भोजपुर जिले के मछली किसान मछली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. दरअसल, जिले में मछली का इंपोर्ट पिछले दो सालों में 40 से 50 प्रतिशत कम हुआ है. बाहर से कुछ मछलियां आयात हो रही हैं तो जिले से कम ही सही पर मछलियों का निर्यात भी होने लगा है. निर्यात होने की वजह से भोजपुर की मछलियां अब बिहार के बाहर यूपी के सीमावर्ती जिले बलिया समेत अन्य जगहों पर भेजी जाने लगी हैं. जिले में 2024-25 में मछली उत्पादन का लक्ष्य 18 टीएमटी (हजार मैट्रिक टन) का था, जबकि उत्पादन लक्ष्य से अधिक 18.55 टीएमटी हुआ था.
वहीं चालू वित्तीय वर्ष में मछली उत्पादन का लक्ष्य 20.19 टीएमटी है और अबतक आधे से अधिक 13.82 टीएमटी उत्पादन हो चुका है. ऐसे में फिर इस साल मछली उत्पादन अपने लक्ष्य को पार कर जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि मछली उत्पादन अगले पांच साल में दोगुना होने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है. जिले में लोग सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर मछली पालन में रुचि दिखा रहे हैं.
किसान हो रहे हैं आत्मनिर्भर
यही वजह है कि पिछले दो सालों में बाहर से मंगाई जाने वाली मछलियों की मात्रा काफी कम हुई है और 40 से 50 प्रतिशत आयात कम हुआ है.
वहीं आयात के बदले कुछ निर्यात भी होने लगा है. बाहर से मंगाई जाने वाली मछलियों की प्रजाति को जिले में ही कई मत्स्य पालक उत्पादन कर कमाई करने लगे हैं.
इससे मछली उत्पादन में जहां भोजपुर आत्मनिर्भर हो रहा है, वहीं लोगों को रोजगार भी मुहैया होने लगा है.
सरकार की योजनाओं के लाभ से लोग मछली पालन में पहले की तुलना में अधिक रुचि दिखा रहे हैं और स्वरोजगार के क्षेत्र में मछली पालक आत्मनिर्भर हो रहे हैं.
विभाग की ओर से भी मछली पालन से जुड़े रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसे लेकर केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं.
निष्कर्ष
मछली उत्पादन बढ़ने से सीधे तौर पर मछली पालकों को फायदा हो रहा है. उनकी इनकम बढ़ रही है और दूसरे लोग भी मछली पालन के प्रति आकर्षित हो रहे हैं. जबकि सरकार यही चाहती भी है.












