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Fish Farming: मछलियों को कैसे खिलाएं फीड, प्राकृतिक और बाहरी फीड में कितना रखना चाहिए फर्क, जानें यहां

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
तालाब में पाली गई मछली की तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन (Fish Farming) का काम एक ऐसा काम है, जिससे आप साल में लाखों रुपए कमा सकते हैं, लेकिन यह काम इतना आसान भी नहीं है. अगर इसकी पूरी जानकारी नहीं हुई तो फिर इसमें नुकसान भी हो सकता है. मछली पालन सिर्फ ये नहीं है कि तालाब खुदवाया और मछली के बीज को उसमें डाल दिया और फिर कुछ दिनों बाद मछलियां तैयार हो जाएंगी और आप उसे बेचकर मुनाफा कमा लेंगे. मछली पालन की कई बारीकियां होती हैं. जिनको जानना भी बेहद ही जरूरी है. तभी मछली पालन के काम में आपको फायदा मिलता है, नहीं तो मछली पालन के काम में नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.

भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग (Department of Fisheries, Government of India) के एक्सपर्ट की मानें तो मछली पालन की तमाम बारीकियां को जानना बेहद ही जरूरी है. तभी मछली पालन में कामयाबी मिल सकती है. लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज आपको इन्हीं बारीकियों में से एक बारीकी के बारे में यहां जानकारी देने जा रहा है, जो बेहद ही अहम है. इसका ताल्लुक मछलियों की ग्रोथ से है.

फीड खिलाने का सही तरीका क्या है
एक्सपर्ट के मुताबिक बहुत से बहुत से मछली पालकों को मछलियों को फीड देने का तरीका ही नहीं मालूम होता है और इससे उन्हें बहुत नुकसान होता है.

क्योंकि कई बार मछली पालक सोचते हैं कि ज्यादा चारा डाल देंगे तो इसे मछलियां जल्दी ग्रोथ कर जाएंगी और उन्हें अच्छा मुनाफा होगा. जबकि यह हकीकत नहीं है.

मछलियों की ग्रोथ हमेशा प्राकृतिक नियम के मुताबिक होती है, चाहे जितनी भी फीड उन्हें दे दिया जाए. मछलियां उतनी ही तेजी से बढ़ेंगी, जितने समय में उन्हें बढ़ना चाहिए

हालांकि दवाएं और संतुलित चारा देकर उनकी ग्रोथ को कुछ तेज किया जा सकता है और इसका फायदा यह भी होगा कि मछलियां स्वस्थ रहेंगी.

वहीं मछलियों के लिए तालाब में हमेशा नेचुरल फीड उपलब्ध रहना चाहिए क्योंकि इससे मछलियों की ग्रोथ तेजी से होती है. साथ ही बाहरी भोजन भी देना चाहिए.

एक्सपर्ट का कहना है कि सबसे अच्छा फार्मूला यह है कि 75 फीसद तक प्राकृतिक भोजन और 25 परसेंट तक बाहरी फीड मछलियों को खिलाया जाए.

इस तरह से फीड देने से मछलियों का फीड कन्वर्जन रेट बहुत अच्छा रहता है. बता दें कि प्राकृतिक भोजन में प्लैंक्टन आता है, जो कत्ला जैसी मछलियों के लिए जरूरी होता है.

रोहू मछली भी प्लैंक्टन खाती है. ग्रास कार्प घास खाती है. अमोल कार्प भी प्राकृतिक भोजन पसंद करती है.

बता दें कि बाहरी फीड के तौर पर फ्लोटिंग फीड, खली और राइस ब्रांड दिया जा सकता है.

निष्कर्ष
मछलियों को प्राकृतिक भोजन के अलावा बाहरी फीड भी देना चाहिए, लेकिन इनकी सही मात्रा देना चाहिए, नहीं तो इससे तालाब में गंदगी बढ़ जाती है. ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. जिससे मछलियों की ग्रोथ भी कम हो जाएगी और इतना ही नहीं मछलियों में मृत्यु दर भी दिखाई दे सकती है.

Written by
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