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Fish Farming Tips: दिसंबर में इन तीन बातों पर जरूर अमल करें मछली पालक, पढ़ें यहां

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. दिसंबर का महीना मछली पालकों के लिए बेहद ही अहम होता है. भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग (Department of Fisheries, Government of India) के मुताबिक दिसंबर के महीने में पानी का तापमान ऑक्सीजन का स्तर और मछलियों के आहार पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है. अगर इन बातों का ध्यान नहीं दिया जाए तो मछली पालन के काम में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. यदि आप मछली पालन के काम में नुकसान नहीं उठाना चाहते और चाहते हैं कि मछलियों की ग्रोथ न रुके तो यहां बताई जाने वाली कुछ अहम बातों पर जरूर अमल करें.

एक्सपर्ट का कहना है कि कम तापमान में मछलियां सुस्त हो जाती हैं. इसलिए उन्हें कम और आसानी से पचने वाला फीड खिलाना चाहिए. यदि ऑक्सीजन की मात्रा तालाब में कम हो गई है तो एयरेटर का इस्तेमाल इस महीने में नियमित रूप से करना चाहिए.

अमोनिया का स्तर जरूर करें चेक
फिश एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि दिसंबर के महीने में तालाब की नियमित रूप से सफाई करना चाहिए. अमोनिया का स्तर जरूर चेक कर लें.

अगर तालाब में अमोनिया गैस उत्पन्न हो गई है तो इससे मछलियों में मृत्यु दर भी दिखाई दे सकती है. वहीं मछलियों को ठंड से बचाने के लिए शेडिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं.

दिसंबर के महीने में मछलियों को धूप मिलना भी बेहद जरूरी है. इसलिए तालाब में जब सीधे धूप पड़ती है तो मछलियों को इससे राहत मिलती है.

यदि आप अमोनिया और नाइट्रेट जैसी गैस को रोकना चाहते हैं तो तालाब का पानी नियमित रूप से बदलते रहें. पोटैशियम परमैंग्नेट या चूने का इस्तेमाल करें.

एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि 15 से 20 दिनों पर जाल चलाकर मछलियों की चाल का पता करें. वह सुस्त हैं या एक्टिव है इस बात की जानकारी होना जरूरी है.

निष्कर्ष
वहीं इस महीने में फंगल इंफेक्शन से बचाने के लिए कॉपर सल्फेट या हल्दी का इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि इन चीजों को आप करते हैं तो ठंड के मौसम में मछली पालन में आपको नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.

Written by
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