नई दिल्ली. मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में मछली पालन परियोजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला और लागत मानदंडों को तर्कसंगत बनाकर क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान करने पर जोर दिया. उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज, विविधीकरण और बहुकृषि के महत्व के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास के लिए आईसीएआर के मजबूत समर्थन पर बल दिया. उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज, विविधीकरण, क्षमता निर्माण और मूल्यवर्धन पर बल देते हुए सतत विकास और निर्यात क्षमता को बढ़ाने में जलाशयों, पिंजरा संस्कृति, डिजिटलीकरण और निजी भागीदारी की भूमिका के बारे में बताया.
राज्य मत्स्य पालन मंत्रियों ने तालाब विकास, इनपुट समर्थन और वित्तीय सहायता सहित प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला, साथ ही सजावटी मत्स्य पालन की क्षमता और युवा उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने एकीकृत खेती को बढ़ावा देने, कौशल और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए पीएमएमएसवाई इकाई लागतों को संशोधित करने का भी आह्वान किया.
भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की अपर सचिव (पशु एवं दुग्ध) सुश्री वर्षा जोशी ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम सहित प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला.
मछली पालन क्षेत्र की उपलब्धियों की कार्ययोजना पेश की
उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों से पशुपालन एवं दुग्ध उद्योग में इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और विकास को बढ़ावा देने के लिए एसएएससीआई योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता का लाभ उठाने का आग्रह किया.
भारत सरकार के मत्स्य विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के मत्स्य पालन क्षेत्र की उपलब्धियों और कार्ययोजना को प्रस्तुत किया.
उन्होंने विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 2,228 करोड़ रुपये के निवेश पर प्रकाश डाला और उत्पादकता वृद्धि, मूल्य श्रृंखला विकास और सतत विकास के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की.
एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय कुमार बेहरा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया, जिसके साथ सत्र का समापन हुआ.
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्य मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक के बाद मुलको डेयरी का दौरा किया.
इस दौरे में मिजो कैफे और पशुपालन एवं डेयरी संगठन (एफपीओ) कार्यालय-सह-बिक्री केंद्र का उद्घाटन, मुलको गाय के घी की लॉन्चिंग, किसानों को तकनीकी सहायता का वितरण और मत्स्य पालन लाभार्थियों के बारे में जाना.
इस दौरे में पशुपालन एवं डेयरी संगठनों (एफएफपीओ) तथा सहकारी समितियों को सम्मानित करना शामिल था, साथ ही क्षेत्र की जमीनी स्तर की सफलता की कहानियों को दर्शाया गया.
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने अधिक उपज देने वाले पशुओं की संख्या को बढ़ाने के लिए अभियान-आधारित कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं और लिंग-आधारित वीर्य के उपयोग पर जोर दिया.
साथ ही निर्धारित समय-सीमा के साथ मिशन-आधारित डेयरी सहकारी समितियों के गठन की घोषणा की.
उन्होंने मिजोरम के किसानों को आश्वासन दिया कि विभाग और एनडीडीबी उत्तर पूर्वी क्षेत्र को डेयरी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूर्ण समर्थन प्रदान करेंगे.
ये पहलें सहकारी समितियों को मजबूत करने, उत्पादकता बढ़ाने और मिजोरम तथा पूरे उत्तर पूर्वी क्षेत्र के किसानों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं.













Leave a comment