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Fisheries: बिहार के चौर क्षेत्रों में मछली पालन को बढ़ावा देगी सरकार

The Department of Fisheries organized the Startup Conclave 2.0 to promote innovation in the fisheries sector.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. बिहार के सीवान जिले के मछली पालकों के लिए बड़ी खुशखबरी है. केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिला को सीवान चौर क्लस्टर विकास परियोजना के लिए चयनित किया है. योजना के चलाने के साथ ही जिले के चौर क्षेत्रों में संगठित तरीके से मछली पालन को बढ़ावा मिलेगा और इससे सैकड़ो किसानों, मछली पालकों तथा उद्यमियों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है. परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में पहल तेज हो गई है.

मत्स्य निदेशालय के निर्देश पर दो सदस्यीय टीम सीवान पहुंची और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना पर चर्चा की. टीम ने जिले के चौर बहुल क्षेत्रों में मत्स्य पालन की संभावनाओं का आकलन किया और परियोजना के सफल क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित किया.

योजना को लेकर आपस में वार्ता करते अधिकारी
योजना के तहत जिले के बसंतपुर, भगवानपुर हाट और गोरेयाकोठी प्रखंडों के चौर क्षेत्रों का चयन किया गया है. इन क्षेत्रों में योग्य मछली पालकों की पहचान कर उन्हें समूह के रूप में संगठित किया जाएगा.

इसके बाद चरणबद्ध तरीके से आधुनिक मत्स्य पालन की गतिविधियां संचालित की जाएंगी. अधिकारियों के अनुसार क्लस्टर आधारित मॉडल से उत्पादन बढ़ेगा, लागत कम होगी और बाजार तक पहुंच भी आसान होगी.

परियोजना के अंतर्गत 25 से 51 किसानों के समूह बनाकर उन्हें सहकारिता मॉडल से जोड़ा जाएगा, इसके लिए जिला सहकारिता विभाग और जिला निबंधन कार्यालय से भी परामर्श लिया गया है.

समूहों का गठन कर मत्स्य पालन को व्यवसायिक स्वरूप देने की की योजना है. इससे किसानों को सरकारी योजनाओं, तकनीकी सहायता और वित्तीय सुविधाओं का लाभ भी आसानी से मिल सकेगा.

जिला मत्स्य पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभागीय स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है.

चयनित क्षेत्रों में मत्स्य पालकों की पहचान, समूह गठन और प्रशिक्षण सहित अन्य प्रक्रियाएं जल्द शुरू की जाएंगी.

उन्होंने कहा कि परियोजना के सफल क्रियान्वयन से जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे.

टीम ने सारण प्रमंडल के संयुक्त निबंधक सैयद मशरूक आलम तथा सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक सह जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार से भी मुलाकात कर योजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की.

अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना जिले को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी.

Written by
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