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Animal: पशुओं की सेहत का अच्छे से ख्याल रखेगी सरकार, ग्वालियर में केयर एंड वेलनेस सेंटर खोलने का ऐलान

सरसों के तेल का सेवन करना बहुत जरूरी है. बाजार का सप्लीमेंट फूड खिलाने से आगे लंबे समय तक दूध नहीं ले पाएंगे. इसलिए बहुत जरूरी है दाने के साथ-साथ घरेलू चीजों से दूध की मात्रा को बढ़ाएं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है. प्रदेश में पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के लिए नई योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर में पशुओं के लिए केयर एंड वेलनेस सेंटर खोलने का ऐलान किया है. इसका उद्देश्य क्षेत्रीय पशुपालकों को अपने पशुधन के स्वास्थ्य और उपचार की बेहतर सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही ग्वालियर के पशु स्वास्थ्य एवं उपचार केंद्र का उद्घाटन किया गया और एक नया पशु चिकित्सालय भी खोला जाना है.

किसान कल्याण वर्ष में सरकार पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है. चाहे गाय का दूध हो वा भैंस का, सरकार पशुपालकों से पूरा दूध खरीदेगी और उन्हें दूध का उचित दाम दिलाने का काम करेगी. सरकार का फोकस इस बात पर है कि पशुपालकों की आय बढ़े और अर्थव्यवस्था मजबूत हो.

गौवंश सहायता राशि दोगुनी
सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया कि गौवंश को पर्याप्त और बेहतर आहार उपलब्ध कराने के लिए सहायता राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रति गौवंश कर दी है.

प्रदेश के हर ब्लॉक में एक-एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है. इन कामों के जरिए दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती दी जाएगी.

सरकार पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में काम कर शही है.

दूध व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह पशुपालकों के अर्थिक स्वावलंबन का सबसे मजबूत माध्यम बन रहा है.

सरकार डेयरी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं को गांवों से ही रोजगार उपलब्ध कराया जा सकेगा.

प्रदेश सरकार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ मिलकर दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है.

नई-नई योजनाएं शुरू की जा ही है और पशुपालकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं.

सरकार ने यह व्यवस्था की है कि केवल 25 गायों की गौशला शुरू करने वाले पशुपालक को भी प्रति यूनिट 10 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जाएगी.

इसके साथ ही प्रदेश की सड़कों पर घूम रहे निराश्रित और आवारा पशुओं को गौशालाओं तक पहुंचाने का अभियान भी चलाया जा रहा है. ऐसी गौशालाओं की स्थापना के लिए सरकार अनुदान उपलब्ध करा ही है.

Written by
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