नई दिल्ली. पीएमएमएसवाई के तहत मछली पालन विभाग ने मछुआरों के 100 तटीय गांवों की जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा ग्राम (सीआरसीएफवी) के रूप में पहचान की है. ताकि उन्हें जलवायु के अनुकूल और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके. 3 हजार करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ जलाशयों में मछलियों के लिए 52 हजार तैरते हुए पिंजरों, 22 हजार रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) और बायोफ्लॉक इकाइयों और रेसवे तथा 1 हजार 525 समुद्री पिंजरे लगाने की स्वीकृति के साथ टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ाया गया है.
बायोफ्लॉक टेक्नोलॉजी मछली पालन का ऐसा तरीका है जो फायदेमंद सूक्ष्म जीवों का उपयोग करके पानी में पोषक तत्वों को रिसाइकल करता है. ये सूक्ष्म जीव बायोफ्लॉक नाम के गुच्छे बनाते हैं जो प्राकृतिक भोजन के रूप में काम करते हैं और पानी को साफ करने में भी मदद करते हैं. इस तरीके में पानी के बहुत कम या नहीं के बराबर बदलाव की आवश्यकता होती है जो इसे न्यूनतम संसाधनों के साथ बड़े पैमाने पर मछली पालन के लिए आदर्श बनाती है. पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ इसमें उत्पादकता में भी वृद्धि होती है. इसे मछली पालन के क्षेत्र में “हरे सूप” या “हेटरोट्रॉफिक तालाब” नाम दिया गया है.
सरकारी सहायता के लिए कैसे करें आवेदन
एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करें जिसमें शामिल है. मछलियों की प्रजातियां जिनका पालन किया जाना है. पूंजी और आवर्ती लागत देनी होगी.
भूमि के स्वामित्व का प्रमाण या कम से कम सात साल के लिए पंजीकृत पट्टे रोजगार और उत्पादन फायदा.
कार्यान्वयन के लिए लगने वाले समय का ब्यौरा आगे की प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ परियोजना रिपोर्ट जिला मत्स्य कार्यालय को प्रस्तुत करें.
योजना के तहत लाभार्थी निम्नानुसार सरकारी सहायता प्राप्त कर सकते हैं.
तालाबों के लिए करें आवेदन
एक व्यक्ति 0.1 हेक्टेयर की 2 इकाइयों तक के लिए सहायता प्राप्त कर सकता है.
समूह या सोसाइयटियों को 0.1 हेक्टेयर की 2 इकाइयों के रूप में सहायता मिल सकती है.
इसमें समूह/सोसायटी के सदस्यों की संख्या के गुणक के अनुसार प्रति समूह 0.1 हेक्टेयर की 20 इकाइयों की सीमा होती है.
टैंकों के लिए
एक व्यक्ति एक बड़े, एक मध्यम या एक छोटे टैंक सेटअप के लिए सहायता प्राप्त कर सकता है.
समूह या सोसायटी को 2 बड़े, 3 मध्यम या 4 छोटे टैंक सेटअप के लिए सहायता प्राप्त हो सकती है.
मछली पालक किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) के लिए, कार्यान्वयन विवरण और क्षेत्र की अधिकतम सीमा संबंधित प्राधिकरण की ओर से तय की जाती है.












